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DNA: भारत ने आज सबसे बड़ी डिफेंस डील पर मुहर लगा दी है. ये डील कैसे पाकिस्तान में डर का माहौल तीन गुना बढ़ाने वाली है, इसका विश्लेषण आज हम करने वाले हैं. आज एक तरफ हिंदुस्तान है और दूसरी ओर पाकिस्तान है. दोनों देशों में सबसे बड़ा फर्क क्या है, भारत पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर और अत्याधुनिक हथियार खरीदने जा रहा है और पाकिस्तान अभी भी बुर्के को हथियार बनाने में जुटा है. 

हम, 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपये खर्च कर बारूदी हथियारों की ताकत बढ़ा रहे हैं. नए-नए हथियार खरीद रहे हैं और वो क्या कर रहे हैं. वो मानव बम तैयार कर रहे हैं. भारत ने वायुसेना और नौसेना के लिए घातक हथियारों की खरीद को मंजूरी दी है और मुनीर का पाकिस्तान महिला आतंकियों की फौज तैयार रहा है. एक ऐसी फौज जो फिदायीन यानी आत्मघाती हमलावर की तरह काम करेगी. पाकिस्तान के इस आत्मघाती हथियार के बारे में हम आपको आगे विस्तार से बताएंगे लेकिन उससे पहले हम, भारत के नए शक्ति प्रदर्शन का विश्लेषण करेंगे.

DAC ने लगाई डील पर मुहर 

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भारत की DAC यानी DEFENCE ACQUISITION COUNCIL ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त रफाल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है . इन 114 में से 90 रफाल फाइटर जेट भारत में ही बनाए जाएंगे यानी इस डील से मेक इन इंडिया अभियान को भी आगे बढ़ाया जाएगा. रफाल वही लड़ाकू विमान है, जिसके पराक्रम का प्रमाण पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिला था. रफाल के लिए फ्रांस से डील की गई है तो अमेरिका के साथ भी दो बड़ी डील को सहमति दी गई है. अमेरिका के साथ होने वाले सौदे के तहत भारतीय नौसेना के लिए 6 P8i टोही विमान खरीदे जाएंगे. नेवी के लिए ही एंटी सबमरीन यानी पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस हेलीकॉप्टर भी खरीदे जाएंगे. जैसा कि हमने आपको बताया, फ्रांस और अमेरिका के साथ होने वाली इन डील्स की लागत 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपए है.

भारतीय सेनाओं ने दिखाया अपना दम-खम 

पिछले 6 साल के अंदर भारतीय सेनाओं ने दो बड़े टकरावों में अपना दम-खम साबित किया है. पहले गलवान की वजह से चीन के साथ लंबे अर्से तक तनाव रहा और फिर पहलगाम का प्रतिशोध ऑपरेशन सिंदूर से लिया गया. इसी वजह से भारतीय सेनाओं को आधुनिक और घातक हथियारों से लैस करना आवश्यक हो गया है. भारत की इस डील से देश की सामरिक शक्ति में कितना इजाफा होगा, ये भी हम आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले आपको देखना चाहिए कि पाकिस्तान का फील्ड मार्शल आसिम मुनीर किस तरह अपनी सामरिक क्षमता में इजाफा कर रहा है. फर्क इतना है कि भारत की तरह मुनीर बारूदी हथियार नहीं खरीद रहा है. मुनीर ने बुर्के को ही हथियार बना लिया है और बुर्के वाली इस रणनीति के लिए मुनीर ने हाफिज सईद के लश्कर-ए-तोएबा को चुना है. 

लश्कर-ए-तोएबा के महिला विंग की तस्वीर आई सामने 

हाल में ही पाकिस्तान के लाहौर में हुए एक जलसे की तस्वीर सामने आई है . इस जलसे में आपको कई बुर्का पहनी हुई महिलाएं नजर आएंगी. दरअसल ये जलसा लश्कर-ए-तोएबा के महिला विंग का है. आतंकियों की इस खातून ब्रिगेड का नाम है तैयबत. अरबी भाषा का ये शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनके अंदर इंसानियत और अच्छे विचार होते हैं लेकिन हाफिज ने बुर्के वाली आतंकियों के लिए इस सुंदर शब्द का गलत इस्तेमाल किया है. हाफिज ने खातूनों की जो टेरर ब्रिगेड बनाई है इसकी कमांडर है इफ्फत सईद. हाफिज की ये टेरर कमांडर कहने को एक प्रोफेसर है लेकिन इफ्फत सईद किस विषय की पढ़ाई कराती है. 

आजकल अंग्रेजी का एक शब्द आप कई बार सुनते होंगे. ये शब्द है GENDER EQUALITY यानी महिला-पुरुष के बीच समानता. ये दुनिया में पहली बार होगा कि आतंक और कथित जिहाद के लिए भी महिला-पुरुष की समानता का दम भरा जा रहा है. खैर ये पाकिस्तान है, यहां आतंक फैलाने और भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए मुनीर कुछ भी कर सकता है. हाफिज सईद ने खातून आतंकियों का चेहरा पहली बार दिखाया है तो आतंक के धंधे में उसके पार्टनर मसूद अजहर के लिए आज एक बुरी खबर आई है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में किस तरह पाकिस्तान और जैश को बेपर्दा किया गया है. ये भी आपको बेहद गौर से देखना चाहिए.

सुरक्षा परिषद की एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने दिल्ली में लाल किले के नजदीक हुए ब्लास्ट पर अपनी रिपोर्ट सामने रखी है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि लाल किला बम धमाके के पीछे मसूद अजहर के जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है. रिपोर्ट में मसूद अजहर की महिला आतंकियों की पलटन यानी जैश-उल-मुमीनात का भी जिक्र है. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जैश की महिला आतंकियों को आने वाले वक्त में बड़ा खतरा करार दिया है.

जैश की महिला आतंकियों को UN में किया जा चुका है एक्सपोज

जैश की महिला आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र में एक्सपोज कर दिया गया है और हाफिज की महिला आतंकियों को हमने आतंकी जलसे की तस्वीरों से एक्सपोज किया है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद से आई ये रिपोर्ट ना सिर्फ मसूद अजहर बल्कि उसके आका आसिम मुनीर की दिक्कतें बहुत हद तक बढ़ा सकती है. वर्ष 2009 से लेकर अब तक जितनी बार भारत ने सुरक्षा परिषद में जैश के खिलाफ प्रस्ताव रखा तो उसके विरोध में चीन ने स्थायी सदस्य होने के नाते वीटो कर दिया. अब सुरक्षा परिषद खुद जैश और आतंकी हमले के कनेक्शन को साबित कर चुकी है. ऐसे हालात में चीन के लिए अगली बार जैश-ए-मोहम्मद के मुद्दे पर वीटो करना काफी मुश्किल साबित होगा. आगे बढ़ने से पहले हम आपको पाकिस्तान का एक दिलचस्प तथ्य बताना चाहते हैं. इन आंकड़ों से आपको पता चल जाएगा कि पाकिस्तान की असलियत  क्या है.

10 हजार से अधिक पाकिस्तानी महिलाएं जुड़ीं

स्वतंत्र आंकलनों के मुताबिक लश्कर-ए-तोएबा और जैश-ए-मोहम्मद के साथ दस हजार से ज्यादा पाकिस्तानी महिलाएं जुड़ी हैं. मसूद अजहर ने जैश-उल-मुमीनात के तहत महिला आतंकियों को भर्ती किया है तो हाफिज सईद ने मुस्लिम वीमेन लीग के झंडे तले महिला आतंकी तैयार की हैं. दूसरी तरफ अगर आप पाकिस्तानी सेना पर नजर डालें तो पाकिस्तानी फौज में सिर्फ 5 हजार महिलाएं हैं जिनमें से तकरीबन 700 अफसर रैंक पर हैं और बाकी 4300 OTHER RANKS हैं. यानी जितनी महिलाएं मुनीर की फौज में नहीं हैं उनसे दोगुनी मसूद और हाफिज की खातून पलटन में मौजूद हैं.

कितने दिन में आतंकी संगठनों ने बनाया ये प्लान?

यहां आपको जानना चाहिए कि महिला आतंकियों को खड़ा करने का ये प्लान कुछ महीनों या सालों में नहीं बना है. बालाकोट में एयरस्ट्राइक की वजह से अंडरग्राउंड होने से पहले मसूद अजहर खुलेआम जिहादी साहित्य लिखता था. ये साहित्य सादी के नाम से लिखा जाता था. उस दौर में मसूद अजहर ने एक निबंध लिखा था. इस निबंध का नाम था मेरी मुसलमान बहना.  

निबंध में मसूद अजहर ने लिखा था कि जिहाद में शामिल होना हर मुस्लिम महिला का फर्ज है. मसूद और हाफिज की वही पुरानी साजिशें आज बुर्के वाले बम की शक्ल में सामने आ रही हैं. जिस महिला को जननी की परिभाषा दी जाती है. उन महिलाओं को आतंक के इन काले किरदारों ने जिंदगी खत्म कर देने वाला हथियार बना दिया है. इस वक्त आपके टीवी स्क्रीन पर पाकिस्तान के लाहौर में हुए एक जलसे की तस्वीर चल रही है. इस जलसे में आपको कई बुर्का पहनी हुई महिलाएं नजर आएंगी. 

दरअसल ये जलसा लश्कर-ए-तोएबा के महिला विंग का है. आतंकियों की इस खातून ब्रिगेड का नाम है तैयबत. अरबी भाषा का ये शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनके अंदर इंसानियत और अच्छे विचार होते हैं लेकिन हाफिज ने बुर्के वाली आतंकियों के लिए इस सुंदर शब्द का गलत इस्तेमाल किया है. हाफिज ने खातूनों की जो टेरर ब्रिगेड बनाई है इसकी कमांडर है इफ्फत सईद. हाफिज की ये टेरर कमांडर कहने को एक प्रोफेसर है लेकिन इफ्फत सईद किस विषय की पढ़ाई कराती है. ये आपको इसकी जुबानी ही सुनना चाहिए. मुनीर का एक ही मकसद है. किसी भी तरह पाकिस्तान में आतंक का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाए और भारत में दोबारा आतंक की आग को सुलगाया जाए. ऐसे ही शत्रुओं को लेकर आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र में एक महत्वपूर्ण बात बताई है.