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Karti Chidambaram: चीनी वीजा स्कैम मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित किया है. हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को कांग्रेस MP कार्ति चिदंबरम से जुड़े सरकारी गवाहों को पूछताछ के लिए न बुलाने का निर्देश दिया है. कार्ति चिदंबरम ने स्कैम से जुड़े CBI केस में अपने खिलाफ तय करने की चुनौती दी है. ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने के बाद सरकारी वकील के सबूत रिकॉर्ड कर रहा है. जानें क्या है पूरा मामला.

जस्टिस मनोज जैन ने निर्देश दिया कि कार्ति से जुड़े किसी भी गवाह को सबूत दर्ज करने के लिए नहीं बुलाया जाएगा और केवल एक औपचारिक गवाह को ही बुलाया जा सकता है. बेंच ने कार्ति चिदंबरम की ओर से आगे की दलीलें सुनने के लिए मामले को 19 मार्च को लिस्ट किया है. वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा, वकील अर्शदीप सिंह और अक्षत गुप्ता, कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश हुए. जिसके बाद यह बताया गया कि ट्रायल कोर्ट सरकारी वकील के सबूत रिकॉर्ड कर रहा है, पिटीशनर के अधिकार पर बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि वह चार्ज फ्रेम करने के खिलाफ रिवीजन में हाई कोर्ट के सामने है.

हाई कोर्ट ने 28 जनवरी को कांग्रेस MP कार्ति चिदंबरम की फाइल की गई अर्जी पर नोटिस जारी किया, अर्जी में ट्रायल कोर्ट के 23 दिसंबर, 2025 के ऑर्डर को चुनौती दी गई है, जिसके तहत चिदंबरम को ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया गया था. अर्जी में ये भी कहा गया है कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8 और 9, साथ ही इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 204 को लागू करने के लिए जरूरी चीजों की पूरी तरह से कमी है, साथ ही यह तर्क दिया गया है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे दूर-दूर तक किसी भी तरह की गैर-कानूनी रिश्वत की मांग या लेने का संकेत मिले.

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एडवांस नोटिस पर पेश होकर, CBI के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने एक छोटा जवाब और स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने के लिए एक छोटी तारीख मांगी, जिसे कोर्ट ने मान लिया. सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि डॉक्यूमेंट्स या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सबूत के तौर पर पेश होने से रोकने के लिए उन्हें नष्ट करने से जुड़ा IPC का सेक्शन 204 का आरोप पूरी तरह से गलत है और रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी मटीरियल से इसका कोई सपोर्ट नहीं मिलता है.

बता दें कि चिदंबरम के खिलाफ क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी, सबूत नष्ट करने और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत एक पब्लिक सर्वेंट को रिश्वत देने और एक कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन द्वारा एक पब्लिक सर्वेंट को रिश्वत देने से जुड़े अपराधों के लिए आरोप तय किए गए हैं. अपनी याचिका में, चिदंबरम ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट यह समझने में नाकाम रहा कि रिकॉर्ड में मौजूद मटीरियल और डॉक्यूमेंट्स पूरी तरह से अलग तस्वीर पेश करते हैं. साथ ही यह दावा किया गया है कि कथित कॉन्सपिरेसी अप्रूवर विकास मखारिया के दिमाग की उपज थी, जिसने कथित तौर पर निजी फायदे के लिए प्रोजेक्ट वीजा के दोबारा इस्तेमाल के लिए मंजूर प्रोविजन का गलत इस्तेमाल किया और बाद में दूसरे आरोपियों पर दोष मढ़ने की कोशिश की. (ANI)