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Election Commission: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की तरफ से जारी एसआईआर के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां बारानगर विधानसभा इलाके में एक युवक ने मतदाता सूची संशोधन के दौरान फर्जी जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया, जिसके चलते वो चुनाव आयोग की की निगरानी में आ गया.  दरअसल, पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर के दौरान मतदाताओं को अपना जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है. 

ऐसे में एक युवक ने अपना जन्म  प्रमाण पत्र चुनाव आयोग को दिया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 6 मार्च 1993 दर्ज थी. लेकिन उनका जन्म प्रमाण पत्र जन्म से 2 दिन पहले जारी किया गया था. जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस पर आपत्ति जताई क्योंकि जन्म से दो दिन पहले प्रमाण पत्र का पंजीकरण असंभव माना जाता है. इस वजह से ही आयोग ने प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया. 

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र
अब चुनाव आयोग ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र दर्ज करवाने वाले युवक की पहचान कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. जिसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदाता पंजीकरण अधिकारी को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 का हवाला दिया है. इसके तहत झूठी जानकारी देने वाले युवक को दंडित किया जा सकता है. आपको बता दें कि एसआई के बाद से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल भी काफी गर्म है.

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चुनाव आयोग करेगा सत्यापन
जहां एक तरफ पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगा रही हैं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर में अनियमितता के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा था. टीएमसी के सांसद और नेताओं ने भी एसआईआर को लेकर कड़ी नाराजगी जताई. तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी टीएमसी पर बांग्लादेशी घुसपैठियों शरण देने का आरोप लगा रही है.  चुनाव आयोग अब मतदाता सूची का सत्यापन 21 फरवरी को करेगा, ये इससे पहले 15 फरवरी को होना था. लेकिन एसआईआर का काम पूरा नहीं होने के कारण तारीख को आगे बढ़ाना पड़ा. 

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