BEL Safran Joint Venture: भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है. इस दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारतीय रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मिलिडेट (BEL) और फ्रांस की प्रमुख कंपनी सफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस (Safran) ने एक जॉइंट वेंचर (JV) की है, इसके जरिए भारत में ‘हैमर’ वेपन सिस्टम के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. ये समझौता न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम करेगा.
BEL और सफरान का गठबंधन
BEL और सफरान के इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत भारत की पब्लिक सेक्टर की कंपनी BEL और फ्रांस की सफरान के बीच की साझेदारी है. इस जॉइंट वेंचर का बड़ा उद्देश्य भारत में उन्नत रक्षा प्रणालियों का निर्माण करना है. इसके जरिए अब तक विदेश से खरीदे जाने वाले जटिल हथियारों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर किया जाएगा. यह कदम प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को मजबूती देता है, जिससे आने वाले समय में रक्षा आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी.
Bharat Electronics forms a joint venture with Safran Electronics and Defense (SEP), France for Project HAMMER. The Company will operate a “Center of Excellence” to act as a Technology cum Teaming Partner for the manufacturing, supply, maintenance and repair of the Guidance Kit… pic.twitter.com/poBHOH3Z6K
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— ANI (@ANI) February 16, 2026
क्या है हैमर वेपन सिस्टम?
हैमर एक बेहद आधुनिक और सटीक हमाल करने वाला हथियार के तौर पर सामने आ रहा है. मूल रूप से ये एक गाइडेंस किट है, जिसे सामान्य बमों पर लगाया जाता है, जिससे उन्हें स्मार्ट बम में बदला जा सके. वहीं इसकी रेंज और सटीकता भी बहुत अच्छी है. यह मिसाइल सिस्टम करीब 70 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने की ताकत रखता है. वहीं भारतीय वायुसेना पहसे से ही राफेल लड़ाकू विमानों में हैमर मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही है. अब भारत में इसके प्रोडक्शन होने से वायुसेना के लिए इन मिसाइलों की आपूर्ति और रखरखाव और भी आसान और सस्ता हो जाएगा.
भारत के लिए इसके रणनीतिक मायने
इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ हथियार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस साझेदारी से फ्रांस से भारत को उच्च तकनीकों का हस्तांतरण किया जाएगा. इससे भारतीय इंजीनिरयरों को उन्नत मिसाइल तकनीक सीखने का मौका मिलेगा. साथ ही घरेलू स्तर पर निर्माण होने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और फ्यूचर में भारत इन वेपन सिस्टम्स का दूसरे देशों को निर्यात करने की स्थिति में भी आ सकता है. ये भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण हब बनाने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है.
