India-Pakistan Cricket Match: टी-20 वर्ल्डकप में भारत की शानदार जीत पर 24 घंटे से पाकिस्तान रो रहा है. माथा पीट रहा है. वहां के लोग खिलाड़ियों से ज्यादा शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को हार का जिम्मेदार मान रहे हैं. पूरा पाकिस्तान एक सुर में कह रहा है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच खेलना ही नहीं चाहिए था. पाकिस्तानियों का कहना है, हारने से अच्छा ‘भागना’ है. अगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भारत के साथ मैच ना खेलने का फैसला नहीं बदलते तो उनका मुल्क भारत के हाथों शर्मनाक हार से बच जाता. यानी शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर के कहने पर पाकिस्तान को हार की जिल्लत से बचाने के लिए पहले जो बायकॉट वाली योजना बनाई थी. वो बिल्कुल सही थी. बांग्लादेश के समर्थन के नाम पर भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने से पाकिस्तान को 2-2 फायदे होते. पहला भारत से करारी हार के बाद पाकिस्तान की फिर से बेइज्जती नहीं होती. दूसरा फायदा बांग्लादेश से एकजुटता दिखाकर आवाम को बता पाते कि पाकिस्तान ने कितना बड़ा त्याग किया है, लेकिन शहबाज शरीफ और मुनीर ने डॉलर की लालच में अपना विचार बदल दिया. जब ये विवाद बढ़ा तो आईसीसी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को समझाया भारत के साथ मैच खेलने से इनकार करने से उसे क्या क्या नुकसान होगा.
बेइज्जती के बाद पाक ने क्यों खेला मैच?
अगर पाकिस्तान भारत से मैच नहीं खेलता तो उसे सीधे 15 मिलियन के राजस्व का नुकसान होता. टूर्नामेंट के बाद ICC से मिलने वाला उसका हिस्सा रोक लिया जाता. टीवी कंपनियां और स्पॉन्सर खास तौर पर भारत-पाक मैच के लिए पैसे देते हैं. अगर मैच नहीं होता तो वो जुर्माना मांगते, जिसकी भरपाई पाकिस्तान को करनी पड़ती. ये संभावित क्लेम 20 से 50 मिलियन तक हो सकता था. इस विवाद से पाकिस्तान का हिस्सा अगले टूर्नामेंट में कम हो सकता था. यानी आने वाले सालों में कमाई पर दबाव पड़ सकता था. जहां पर बात डॉलर की आती है वहां पाकिस्तान के हुक्मरान अपने देश के सम्मान और अपनी जुबान से निकली बात को भूल जाते हैं. इसीलिए भारत से नहीं खेलने का बयान देने वाले शहबाज ने एलान किया कि 15 फरवरी को मैच होगा और अब पाकिस्तानी कह रहे हैं कि इस शर्मनाक हार से बेहतर तो बायकॉट ही होता. वैसे शहबाज शरीफ हों या फिर आसिम मुनीर डॉलर के बदले पाकिस्तान हथियारों, सैनिकों और उसूलों का सौदा करने से भी पीछे नहीं हटता. डॉलर के लिए मुनीर ने भी गुप्त सौदें किए हैं. ईरान की खुफिया एजेंसी Ministry of Intelligence of Iran यानी MOIS ने बड़ा दावा किया है, जिसके मुताबिक पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार 10 अरब अमेरिकी डॉलर में सऊदी अरब को बेच दिए हैं. हथियारों को सऊदी अरब में तैनात करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. ईरानी एजेंसी का दावा है कि यह फैसला आसिम मुनीर और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मुलाकात के बाद हुआ है. गाजा में डॉलर के बदले आसिम मुनीर सैनिकों की तैनाती का समझौता भी कर चुका है. गाजा में एक सैनिक की तैनाती के बदले 1 हजार डॉलर महीने का भुगतान भी मिलेगा. इसी वजह से पाकिस्तान इजरायल के साथ मिलकर काम करने को भी तैयार है.
दुम दबाकर भागा नकवी
जो सेना प्रमुख डॉलर के बदले अपनी सेना का सौदा करने को तैयार है. वो पाकिस्तानियों को हार की जिल्लत से बचाने के लिए डॉलर के नुकसान को झेलने के लिए कैसे तैयार होता. मुनीर के आदेश के बाद शहबाज ने बायकॉट खत्म करने का एलान किया. भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हुआ, जिसका नतीजा वही निकला जो निकलना था. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में दर्द की सुनामी आ गई है. ये पाकिस्तानियों का गुस्सा है, जो अपने खिलाड़ियों पर फूट रहा है, लेकिन इस गुस्से का शिकार सिर्फ खिलाड़ी नहीं हैं. पाकिस्तान के वो हुक्मरान भी हैं, जो आसिम मुनीर से रिश्तेदारी की वजह से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन बनकर बैठे हैं और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का बेड़ा गर्क कर रहे हैं. एशिया कप में जीत के बाद भारत की ट्रॉफी चोरी करके भागने वाला PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी भी पाकिस्तानियों के निशाने पर है. नकवी रिश्ते में आसिम मुनीर का साला है. मोहसिन नकवी को एशिया कप के फाइनल मैच के बाद हुई अपनी बेइज्जती आज तक याद है. यही वजह है कि मोहसिन नकवी, जो कल कोलंबो में भारत पाकिस्तान का मैच देखने के लिए मौजूद था. उसने अपनी टीम की हालत देखकर मैच खत्म होने का इंतजार तक नहीं किया और मैच खत्म होने से पहले ही स्टेडियम से बाहर निकल गया. मोहसिन नकवी ने सोचा था मैच बायकॉट करने का विवाद खड़ा करके पाकिस्तान में उसका काफी नाम हो गया है और गलती से अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच जीत गया तो वो आसिम मुनीर के सामने अपने प्वाइंट बढ़ा लेगा, लेकिन उसके द्वारा चुनी गई सिफारिशी पाकिस्तानी टीम ने उसके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया और एशिया कप में ट्रॉफी चोरी करके भागने वाला मोहसिन नकवी स्टेडियम से गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गया.
भारत ने पाकिस्तान के साथ हाथ नहीं मिलाया
मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन होने के साथ साथ पकिस्तान का गृह मंत्री भी है. उस पर टीम में सिफारिशी खिलाड़ियों को भर्ती करने का आरोप भी लगता रहता है. आसिम मुनीर का साला होने की वजह से कोई भी मोहसिन नकवी के फैसलों पर सवाल नहीं खड़े करता, लेकिन भारत से मिली इस हार के बाद मोहसिन नकवी पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर भड़क गए हैं. शोएब अख्तर समेत कई क्रिकेटरों ने नकवी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया है. पाकिस्तानियों को भी लगता है कि नकवी ने पाकिस्तान के क्रिकेट को राजनीति का अखाड़ा बना दिया हैऔर जहां खेल में राजनीति की एंट्री होती है, वहां खेल का बर्बाद होना तय होता है. पाकिस्तान के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. टी-20 विश्वकप में पाकिस्तान पर भारत की धमाकेदार जीत ने बलोचिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों को भी जश्न मनाने का बड़ा मौका दे दिया. जब बलोचिस्तान और अफगानिस्तान में भारत की जीत पर जश्न हो रहा है तो भारत के कोने कोने से जश्न की तस्वीरें दिखाई देना स्वाभाविक है. श्रीनगर के लाल चौक पर भारत की जीत के बाद जोरदार जश्न हुआ और अयोध्या में भी मिठाइयां बांटी गईं, लेकिन भारत में एक कुंठा क्लब ऐसा भी है जो इस मैच के बाद शोक में डूबा हुआ है. इस कुंठा क्लब में कई डिजाइनर पत्रकार, कई राजनेता और कुछ क्रिकेटर्स भी शामिल हैं. इस मैच के दौरान भी भारतीय टीम ने आतंकी देश पाकिस्तान की टीम से हाथ नहीं मिलाने की परंपरा को जारी रखा. पहलगाम हमले के बाद से भारतीय टीम पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिला रही है. इसीलिए ना टॉस के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा से हाथ मिलाया. ना मैच जीतने के बाद दोनों देशों के खिलाड़ियों ने एक दूसरे की तरफ हाथ बढ़ाए, लेकिन ये बात कुछ भारतीयों को बहुत बुरी लग रही है.
हाथ नहीं मिलाने पर क्यों लग रही मिर्ची?
भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा है. यह ‘हाथ न मिलाने’ वाली बात भारत ने शुरू की है, जो बिल्कुल बचकानी है. यह हमारे जैसे देश को शोभा नहीं देती या तो खेल की भावना के अनुसार ठीक से खेलिए, वरना बिल्कुल मत खेलिए और कुछ ऐसी ही बात आरजेडी नेता मनोज झा ने भी कही है. एक नामी पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा के एक सांसद कह रहे हैं कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की टीम से हाथ नहीं मिलाना एक नौटंकी है. ये हास्यापद है. ये बचकानी बात है. मित्रों जब भारत के क्रिकेटर पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाते तो सिर्फ पाकिस्तान नहीं बल्कि पूरी दुनिया को संदेश देते हैं. पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है, जिसने भारत में आतंकी हमला करवाया. जिस देश से आए आतंकियों ने धर्म पूछकर भारत में हिंदुओं को गोली मारी. दुनिया में भी जब इस बात की चर्चा होती है कि भारत के खिलाड़ी पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ क्यों नहीं मिलाते तो पाकिस्तान का आतंकी चरित्र दुनिया के सामने उजागर होता है, लेकिन भारत के कुछ नेताओं और खिलाड़ियों को ये एक नाटक लगता है और आतंक के खिलाफ भारतीय क्रिकेटरों की भावनाएं उनको आहत करती हैं. यही वजह भारत की जीत के बावजूद एक कसक उनके बयानों में दिखाई दी. मैच जीतने की खुशी के बजाय उन्होंने हाथ नहीं मिलाने की निंदा को जरूरी समझा. इस दौरान इस बात की परवाह भी नहीं की गई इससे देश में कई लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं.
