Western Command Headquarters: भारत-अमेरिका के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और US इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो ने इंडियन आर्मी के वेस्टर्न कमांड हेडक्वार्टर का दौरा किया. यहां पर उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ भारत के वेस्टर्न फ्रंट पर स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी डायनामिक्स पर चर्चा की. यह वही कमांड है जहां से भारत पाकिस्तान की हर चाल पर नजर रखता है. जानिए क्यों अहम है यह दौरा.
क्यों अहम है वेस्टर्न कमांड?
अगर हम भारत के लिहाज से देखें तो वेस्टर्न कमांड काफी ज्यादा अहम है, ये चंडीगढ़ के पास स्थित है, यहीं से भारतीय सेना की रणनीति बनती है. यहां पर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र है जिसकी वजह से इसे स्टील शील्ड भी कहा जाता है. यह कमांड पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू के कुछ हिस्सों की जिम्मेदारी संभालती है.
पाकिस्तान की हर चाल पर नजर
यह वही जगह है जहां से भारत पाकिस्तान के हर चाल पर नजर रखता है. पाकिस्तान सीमा पार क्या कर रहा है, इसके बारे में भी इस कमांड से जानकारी मिलती है. इस कमांड की सीमा पाकिस्तान के साथ लगी है और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) की रक्षा करती है. यह वही कमांड है जो फ्रंट वॉर की चुनौती को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
क्यों पाकिस्तान खाता है खौफ?
इस कमांड से सबसे ज्यादा खौफ पाकिस्तान खाता है. 1965 और 1971 के युद्धों में वेस्टर्न कमांड ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया था. साल 1971 में जब पाकिस्तान मोर्चा आगे बढ़ रहा था तो इसी कमांड ने मोर्चा संभाला और युद्ध में पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए. इस कमांड ने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद से इस कमांड की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है.
क्यों अहम है दौरा
भारत में अमेरिकी राजदूत, सर्जियो गोर और US-INDOPACOM कमांडर, एडमिरल सैमुअल जे. पापारो ने वेस्टर्न कमांड के हेडक्वार्टर का दौरा किया. वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ भारत के वेस्टर्न फ्रंट पर स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी डायनामिक्स पर अहम बातचीत की. डेलीगेशन को वेस्टर्न फ्रंट के नजरिए के बारे में पूरी जानकारी दी गई, जिसमें ऑपरेशनल तैयारी, खास विरासत, ऑपरेशन सिंदूर का काम और देश बनाने और इलाके की स्थिरता को मज़बूत करने में भारतीय सेना की अहम भूमिका शामिल है. यह कोई पहली बार नहीं है जब कोई अमेरिकी राजनयिक यहां गया हो, इससे पहले भी कई लोग जा चुके हैं. राजदूत का अचानक मुख्यालय जाना एक ‘मजबूत सिग्नल’ है. जो भारत अमेरिका के रिश्तों की गवाही दे रहा है. सर्जियो गोर केवल एक राजदूत नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं.
