Galgotias University: इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक रोबोडॉग के पेश किया, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी की ओर से पेश किया गया रोबोडॉग चीनी कंपनी Unitree का है. विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई दी है. हालांकि, विश्वविद्यालय की इस हरकत पर सरकार ने एक्शन लिया है. गलगोटिया विश्वविद्यालय को इंडिया AI समिट एक्स्पो को खाली करने को कहा गया है. अभी ये विवाद थमा नहीं था कि एक नया मामला सामने आ गया है.
इस बार भी गलगोटिया विश्वविद्यालय की तकनीक नवाचार की दावेदारी पर सवाल खड़े हुए हैं. दरअसल, यूथ कांग्रेस ने एक बड़ा दावा किया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि गलगोटिया विश्वविद्यालय भारत के पहले ड्रोन सॉकर को पूरी तरीके से बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन वास्तव में यह कोरिया का स्ट्राइकर वी3 एआरएफ है. इतना ही नहीं यूथ कांग्रेस ने सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन पर भी कटाक्ष किया है.
गलगोटिया ने का नया कांड आया सामने?
यूथ कांग्रेस ने एक्स पर बुधवार को एक पोस्ट में गलगोटिया विश्वविद्यालय के सॉकर बॉल में ड्रोन सिस्टम का वीडियो शेयर किया. इस दौरान लिखा कि पहले चीन अब कोरिया. तंज कसते हुए यूथ कांग्रेस ने कहा कि गलगोटिया ‘उधार ली गई’ इनोवेशन के वर्ल्ड टूर पर है. इस पोस्ट में लिखा गया है कि उनका (गलगोटिया विश्वविद्यालय) दावा है कि उन्होंने कैंपस में भारत का पहला ड्रोन सॉकर पूरी तरह से बनाया है, लेकिन वास्तव में यह कोरिया का स्ट्राइकर वी3 एआरएफ है.
First China, now Korea. Galgotias is on a world tour of ‘borrowed’ innovation.
They claimed to have built India’s first Drone Soccer from scratch on campus, but it’s actually just a Striker V3 ARF from Korea.
Atmanirbhar’ or just ‘Atmanir-buy’ Modi ji? pic.twitter.com/8iRUeU0aAJ
— Indian Youth Congress (@IYC) February 18, 2026
वीडियो में क्या दिखा?
एक्स पर यूथ कांग्रेस की ओर से पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक प्रोफेसर दावा कर रही हैं कि सॉकर गेंद के आकर के ड्रोन सिस्टम में इंजीनियरिंग से लेकर इसकी एप्लीकेशन तक सब कुछ विश्वविद्यालय में बनाया गया है. उन्होंने दावा किया है कि यह भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है.
रोबोडॉग को लेकर विवादों में विश्वविद्यालय
गौरतलब है कि इससे पहले गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने तकनीक प्रदर्शन के लिए अपने स्टॉल पर एक रोबोडॉग रखा था. बाद में दावा किया गया कि यह डिवाइस कथित तौर पर चीन में निर्मित है और वहीं की एक कंपनी ने इसको बनाया है. अब इस रोबोडॉग पर विवाद खड़ा हो गया है.
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