News in Brief

एआई समिट में चीनी रोबोडॉग को ‘अपनी खोज’ बताने को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की खूब किरकिरी हो रही है. इधर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक स्कॉलर का पुराना शोध वायरल हो गया है. कुछ साल पहले इस शोध को प्रकाशित किया गया था. रिसर्च टॉपिक था- ‘थाली और घंटी बजाकर कोरोना वायरस मारा जा सकता है!’ मार्च-अगस्त 2020 के जर्नल में यह पब्लिश हुआ था. साफ है उस समय दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी. एब्सट्रैक्ट में लिखा गया है कि अभी कोई स्पेशल वैक्सीन नहीं है. कुछ सपोर्टिव थेरपी की बात करते हुए इसमें कहा गया कि उम्मीद है कि साउंड वाइब्रेशंस से इस वायरस को मारा जा सकता है. नीचे शोध को गौर से पढ़ भी सकते हैं. 

अब इस शोध पर लोग यूनिवर्सिटी के बारे में तमाम बातें लिख रहे हैं. वैसे, इस समय यह शोध ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है. इसे पब्लिशर ने पेज से हटा दिया है. पब्लिशर ने ऑनलाइन इस आर्टिकल को हटाने की जानकारी भी शेयर की है. इसे गलत पेपर बताया गया है, जो रीडर्स को भ्रमित कर रहा है और पूरी साइंटिफिक कम्युनिटी में गलत संदेश जा रहा है.  fallback

इसके बाद लेखक, एडिटर और इस शोध को पब्लिश करने के लिए जिम्मेदार पूरे स्टाफ पर कार्रवाई की गई थी. सोशल मीडिया पर कई शोधार्थियों ने अब लिखा है कि इससे क्या ही उम्मीद कर सकते हैं. 

Add Zee News as a Preferred Source

रोबोडॉग का मामला बढ़ने पर एक दिन पहले भारत मंडपम में यूनिवर्सिटी से स्टॉल खाली करने को कहा गया था. यहीं पर वो चाइनीज रोबोटिग डॉग प्रदर्शनी में दिखाया गया था और उसे इन-हाउस इनोवेशन के तौर पर बता दिया गया. सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कुछ लोग यूनिवर्सिटी को सुना रहे हैं तो कुछ लोग उस प्रोफेसर को यह कहते हुए क्लीन चिट दे रहे हैं कि उनसे तो जो कहा गया था वह अपना काम कर रही थीं. यह वीडियो चीनी हैंडल्स से भी शेयर किया जा रहा है. 

विपक्ष सरकार को सुना रहा है.