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Badlapur illegal egg harvesting racket: महाराष्ट्र के बदलापुर से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है. पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो गरीब महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके शरीर से अंडाणु निकालकर ऊंचे दामों पर बेचता था. चौंकाने वाली बात यह है कि एक पीड़ित महिला से तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 33 बार अंडाणु निकाले गए, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई. अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस नेटवर्क में और कौन-कौन से अस्पताल और डॉक्टर शामिल हैं. आज हम इस खबर के बारे में डिटेल से जानेंगे.

इसके बदले उनसे अंडाणु निकलवाए जाते थे. शुरुआती जांच में सामने आया है कि अब तक लगभग चालीस महिलाओं का शोषण किया गया है. मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित महिला ने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में शिकायत की कि उसे तय पैसे नहीं दिए गए हैं. इसके बाद डॉक्टर ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी और जांच शुरू हुई.

बार-बार निकलवाए जाते थे अंडाणु 

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ महिलाओं से बार-बार अंडाणु निकलवाए गए थे. एक महिला से तो तैंतीस बार यह प्रक्रिया कराई गई थी. जबकि कानून के मुताबिक कोई भी महिला जीवन में केवल एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है. वो भी पैसे के लिए नहीं.

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स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर ज्योत्सना सावंत ने महिला की हालत देखकर पुलिस को सूचना दी थी. इसके बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की. अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक जगह तक सीमित नहीं लगता है, बल्कि ये पूरे प्रदेश में फैला हुआ है.

छापे में दवाइयों के इंजेक्शन हुए बरामद

पुलिस ने मुख्य आरोपी सुलक्षणा गाडेकर के घर पर छापा मारा, जहां से ये अवैध काम चलाया जा रहा था. वहां से अंडाणु बनने की प्रक्रिया तेज करने वाली दवाइयों के इंजेक्शन बरामद किए गए थे. जांच में पता चला कि महिलाओं को बिना किसी सही चिकित्सकीय सलाह के इंजेक्शन लगाए जाते थे. 

इसके बाद अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती थी. फिर महिलाओं को अलग-अलग प्रजनन उपचार केंद्रों में ले जाया जाता था. वहां शल्य कक्ष में उनके अंडाणु निकाले जाते थे. आरोपी के मोबाइल फोन से कई तस्वीरें भी मिली हैं. इनमें दवाइयों की फोटो, जांच प्रक्रिया की तस्वीरें, महिलाओं की तस्वीरें, और नकली हलफनामे शामिल हैं.

टारगेट थी आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं

इस मामले में पुलिस ने अश्विनी चाबुस्कर और मंजूषा वानखेड़े को भी गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक सुलक्षणा गाडेकर इस पूरे गिरोह को चला रही थी. बाकी दोनों महिलाएं एजेंट की भूमिका में थीं. ये महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को ढूंढती थीं, उन्हें पैसों का लालच देती थीं और पूरी प्रक्रिया के लिए तैयार करती थीं. 

पुलिस को लेन-देन से जुड़े कई अभिलेख भी मिले हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि जांच केंद्रों. प्रजनन उपचार केंद्रों. दवा सप्लाई करने वालों और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों से भी मिलीभगत थी. तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है. अदालत ने उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. सचिन गोरे ने बताया कि इस मामले की गहराई से जांच के लिए तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं. 

आगे और भी हो सकती हैं गिरफ्तारियां

उन्होंने कहा कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. यह मामला ठाणे जिले से जुड़ा हुआ है. पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर काम कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों से महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होता है. इसलिए पूरे नेटवर्क को उजागर करना और दोषियों को पकड़ना पुलिस की प्राथमिकता है.

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