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Tejas fighter jet crash: इस महीने इंडियन एयरफोर्स के तेजस लड़ाकू जेट से जुड़ा एक और हादसा सामने आया है. ये जेट प्रशिक्षण उड़ान पूरी कर हवाई अड्डे पर लौट रहा था. लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या आई और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. एएनआई के मुताबिक ये घटना 7 फरवरी की बताई जा रही है. आज हम भारत सरकार और एचएएल के बीच हुए तेजस डील और बाकी 2 जेट्स के क्रैश के बारे में डिटेल से बताएंगे. 

फिलहाल हुए क्रैश में राहत की बात यह रही कि पायलट समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गया था. उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है. हालांकि जेट को भारी नुकसान पहुंचा है. ये 2016 में सेवा में शामिल होने के बाद तेजस से जुड़ी तीसरी बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है.

हादसे के तुरंत बाद इंडियन एयरफोर्स ने सख्त कदम उठाते हुए लगभग 30 सिंगल-सीट तेजस जेट्स के पूरे बेड़े की उड़ानों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है. अब ये सभी जेट्स एक तकनीकी जांच से गुजरेंगे और हरी झंडी मिलने तक उड़ान नहीं भर पाएंगे. हालांकि, इस पूरे मामले और जेट्स को ग्राउंड किए जाने पर वायुसेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

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इससे पहले भी 2 हादसे

तेजस लड़ाकू विमान का पहला बड़ा हादसा 2024 मार्च में राजस्थान के जैसलमेर के पास हुआ था. उस समय विमान एक शक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लेकर लौट रहा था. उस हादसे में भी पायलट सुरक्षित बाहर निकल आया था.

दूसरा हादसा नवंबर दो हजार पच्चीस में दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एयर शो के दौरान हुआ था. उस दुर्घटना में पायलट की जान चली गई थी. अब ताजा हादसे ने एक बार फिर तेजस कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तेजस जेट्स पर भारत सरकार लगा रही है दाव

भारतीय वायुसेना अपनी घटती लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या को मजबूत करने के लिए तेजस जेट्स पर बड़ा दांव लगा रही है. एयरफोर्स की योजना अलग अलग वर्जन में कुल 180 तेजस जेट शामिल करने की है. 

इसी कड़ी में साल 2021 में तेजस मार्क 1A के 83 जेट्स का बड़ा ऑर्डर दिया गया था. इस सौदे की कीमत लगभग 46 हजार करोड़ रुपये थी. इसके बाद 2025 सितंबर में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 97 और जेट्स का समझौता किया था. इस सौदे की लागत 62,370 करोड़ रुपये रही थी.

कैसा है तेजस मार्क 1A जेट?

तेजस मार्क 1A, तेजस का एडवांस वर्जन है. ये सिंगल इंजन वाला एडवांस मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने बनाया है. ये विमान वायु रक्षा, समुद्री निगरानी और सटीक हमले जैसे कई काम करने में सक्षम है. 

इस वर्जन का अगला और अधिक एडवांस रूप तेजस मार्क 2 होगा. भविष्य में इसके शामिल होने से एयरफोर्स की ताकत और बढ़ने की उम्मीद है. आने वाले 15 सालों में जब सभी नियोजित जेट्स शामिल हो जाएंगे, तब एयरफोर्स के पास लगभग 40 मूल तेजस, करीब 180 तेजस मार्क 1A और कम से कम 120 तेजस मार्क 2 जेट्स होंगे. 2012 में देश की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए 42 लड़ाकू स्क्वाड्रन की मंजूरी दी गई थी. 

ये फैसला चीन और पाकिस्तान के साथ एक साथ युद्ध की आशंका को ध्यान में रखकर लिया गया था. एक स्क्वाड्रन में 18 लड़ाकू जेट्स होते हैं. तेजस को इसी रणनीति का जरूरी हिस्सा माना जा रहा है.

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