Rahul Gandhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 को विपक्ष ने जुमलाबाजी बताया है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 11 सालों में कुछ नहीं किया है, तो इस बार क्या करेंगी. इस बजट को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कल कहेंगे, अपनी बात रखने के लिए संसद का इस्तेमाल करेंगे. जबकि कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पिछले 12 साल की तरह एक बार फिर केंद्रीय बजट में हरियाणा खाली हाथ रहा, केंद्र की बीजेपी सरकार हरियाणा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है. इसके अलावा किसने क्या कहा जानते हैं.
क्या बोले शशि थरूर
वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि हमें बहुत कम डिटेल्स मिलीं, 3-4 हेडलाइंस थीं, लेकिन हम ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का इंतजार कर रहे थे, वह कहां है? हम इसे केरल में चाहते थे. हमारे यहां आयुर्वेद की बहुत पुरानी परंपरा है लेकिन हमने केरल का नाम नहीं सुना, हमने मछुआरों और नारियल के नाम सुने – वह केरल हो सकता है लेकिन जब उन्होंने शिप रिपेयर की बात की, तो उन्होंने वाराणसी और पटना का नाम लिया लेकिन केरल का नहीं, यह थोड़ा हैरान करने वाला है. शायद बजट डॉक्यूमेंट में और डिटेल्स हों मैंने अभी उसे पढ़ा नहीं है, स्पीच में बहुत कम डिटेल्स थीं.
संसद का इस्तेमाल करेंगे।” pic.twitter.com/hAQL0fFweV
(@AHindinews) February 1, 2026
दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कही ये बातें
इसके अलावा एक ट्वीट करते हुए कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं नायब, केंद्रीय बजट से हरियाणा फिर गायब, पिछले 12 साल की तरह एक बार फिर केंद्रीय बजट में हरियाणा खाली हाथ रहा, केंद्र की बीजेपी सरकार हरियाणा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है. जबकि, हरियाणा से देश में सबसे ज्यादा GST कलेक्शन और टोल टैक्स वसूली होती है, लेकिन बजट में हिस्सेदारी जीरो रहती है.
यूनियन बजट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “हमें बहुत कम डिटेल्स मिलीं। 3-4 हेडलाइंस थीं, लेकिन हम ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का इंतज़ार कर रहे थे। वह कहां है? हम इसे केरल में चाहते थे। हमारे यहां आयुर्वेद की बहुत पुरानी परंपरा है। लेकिन हमने केरल का नाम नहीं… pic.twitter.com/VVIJC7bAMv
February 1, 2026
क्या बोले मनोज झा?
जबकि RJD सांसद मनोज झा ने लिखा कि आज बजट एक बार फिर देश की विशाल आबादी को प्रभावित करने वाले दो सबसे गंभीर मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहा है. तेजी से बढ़ती ‘आय की असमानता’ और ‘भयावह बेरोज़गारी’. इन संरचनात्मक संकटों से जूझने के बजाय बजट ने सतही उपायों और भारी-भरकम शब्दावली का सहारा लिया है. शब्दों की यह सजावट एकाध दिन की सुर्खियां तो बना सकती है, लेकिन आम लोगों की आर्थिक वास्तविकताओं/चिंताओं में कोई बदलाव नहीं ला सकती.
क्या बोले अखिलेश यादव?
ये गरीब किसान और गांव में रहने वाले लोगों के समझ से बाहर बजट है. ये बजट गरीब का पेट नहीं भर सकती है. नौकरी रोजगार दिए नहीं सपने दिखाने वाला बजट है.
