
Khalistan Terrorism News: खालिस्तानी आतंक को अब जड़ से खत्म करने का वक्त आ गया है. इसके लिए बाकायदा तारीख भी मुकर्रर हो गई है. ये तारीख है 27 जनवरी. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं. अब इसे समझिए. असल में यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेयर 26 जनवरी को बतौर मेहमान भारत आने वाली हैं. 27 जनवरी को उर्सुला वॉन डेयर की मौजूदगी में भारत और यूरोपियन यूनियन ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते पर दस्तखत भी करने वाले हैं . अब हम आपको इसी प्रस्तावित समझौते की डिटेल्स बताने जा रहे हैं.
आतंक पर मिलकर प्रहार करेंगे भारत-ईयू
इस समझौते का पहला बड़ा बिंदु होगा मैरिटाइम सिक्योरिटी यानी समंदरी सुरक्षा में सहयोग. दूसरा मुख्य बिंदु है इंटेलिजेंस शेयरिंग यानी इंटेलिजेंस से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान. तीसरा मुख्य और सबसे बड़े बिंदु है काउंटर टेरेरिज्म यानी आतंक के खिलाफ साझा कार्रवाई.
आतंकवाद से जुड़े इसी तीसरे बिंदु की वजह से खालिस्तानी आतंकियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं की नींद उड़ी हुई है. पारंपरिक तौर पर कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन खालिस्तानियों के केंद्र माने जाते हैं. लेकिन पिछले 3 सालों में खालिस्तानी आतंकियों ने यूरोपीयन यूनियन के अन्य सदस्य देशों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं. अब हम खालिस्तानी आतंकियों के इसी नए पैटर्न को एक्सपोज करने जा रहे हैं.
इन यूरोपीय देशों में है आतंकियों का बेस
खालिस्तानी आतंकियों की बड़ी मौजूदगी जर्मनी में है जहां खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े 9 टेरर कमांडर छिपे हैं. क्रोएशिया में भी खालिस्तानी आतंकी मौजूद हैं. 2 दिन पहले यानी 22 जनवरी को खालिस्तानी आतंकियों ने एक भीड़ को उकसाया था जिसने क्रोएशिया की राजधानी जागरेब में भारतीय दूतावास के बाहर तोड़फोड़ की थी.
इटली और पुर्तगाल में खालिस्तानी आतंकियों का फंडिंग नेटवर्क मौजूद है जो हवाला के जरिए टेरर फंडिंग को अंजाम देता है. भारतीय एजेंसियों के मुताबिक बब्बर खालसा के आतंकी मेहल सिंह ने फ्रांस की राजधानी पेरिस को आतंकी भर्ती करने का बेस बना रखा है.
अब बंद हो जाएगी आतंकियों की फंडिंग
खालिस्तानी आतंक को हवा देने वाले ये किरदार राजनीतिक शरण की आड़ में यूरोपीय देशों में जाकर बसे थे लेकिन अब यूरोपीय देश भी इनकी आतंकी विचारधारा को पहचान चुके हैं. जब भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आतंक रोधी समझौता हो जाएगा तो ये खालिस्तानी आतंक के यूरोपीय चैप्टर पर सबसे बड़ा प्रहार होगा. यूरोपीय देशों से भारत को ना सिर्फ इनकी जानकारी मिलेगी बल्कि इस आतंक को खत्म करने के लिए भी यूरोपीय देश बाध्य होंगे.
