Ramachandra Guha: रामचंद्र गुहा ने 42 मिनट के एक इंटरव्यू में हिंदू पाकिस्तान की थ्योरी पेश की. गुहा साहब ने ये बताने की कोशिश की, आज का हिंदुस्तान पाकिस्तान जैसा हो गया है. उन्हें आज के भारत में वैसी ही बर्बरता दिख रही है, जैसा मध्यकाल यानी मुगल काल के दौरान होती थी. एक मीडिया हाउस को दिये 42 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने हिंदू पाकिस्तान के नैरेटिव को सही ठहराने के लिए 6 तर्क दिये हैं.
‘पाकिस्तान जैसा हो रहा भारत…’
नंबर एक 2026 में भारत हिंदू पाकिस्तान बनने के जितना करीब है, उतना पहले कभी नहीं था. यानी गुहा साहब को लग रहा है कि ये साल जो अभी शुरू हुआ है, जिसके सिर्फ 40 दिन बीते हैं. इन 40 दिनों में इस महान इतिहासकार ने अंदाजा लगा लिया कि भारत हिंदू पाकिस्तान बन रहा है. नंबर दो, राजनीति, कानून, शब्द और कामकाज में भारत, पाकिस्तान जैसा ही होता जा रहा है. नंबर तीन, भारत और पाकिस्तान में फर्क बस इतना है कि यहां मुसलमान नहीं, हिंदू दूसरे धर्मों के नागरिकों पर शासन करते हैं. ये सारे तर्क हैं. हिंदू पाकिस्तान के नैरेटिव को सही साबित करने के लिए. नंबर चार, भारत में मुसलमानों को हाशिए पर धकेला जा रहा है. पिछले तीन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं होना. सार्वजनिक जीवन से मुसलमानों को बाहर करना है. नंबर पांच, मुसलमानों को हिंदुस्तान में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया जा रहा है. उनके साथ मध्ययुगीन बर्बरता जैसा व्यवहार हो रहा है और नंबर छह, भारत में मुसलमान अपने हिंदू आकाओं की मनमानी पर जीते और काम करते हैं. इतिहासकार रामचंद्र गुहा साहब ये साबित करना चाहते हैं कि सरहद के उस पार मुस्लिम पाकिस्तान है और इस पार हिंदू पाकिस्तान है. मतलब जैसी स्थिति पाकिस्तान में है, वैसी ही स्थिति आज भारत में भी है. विद्वान गुहा जी को अचानक हिंदू पाकिस्तान वाला विचार कहां से आया. क्या गुहा साहब की हिंदू पाकिस्तान वाली थ्योरी तर्कसंगत है?
हिंदुओं पर लांछन लगाने की साजिश
अगर भारत हिंदू पाकिस्तान होता अगर भारत में हिंदू दूसरे धर्मों के नागरिकों पर शासन कर रहे होते तो क्या यामीन और यासीन जैसे शख्स दिल्ली में हिंदू दुकानदार की हत्या करने का दुस्साहस कर सकते थे. दिल्ली के मयूर विहार में मोबाइल चार्ज करने से मना करने पर वीर सिंह की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. आरोपी के नाम यामीन और यासीन हैं. इन दोनों हमलावरों ने दुकानदार वीर सिंह से मोबाइल चार्ज करने को कहा. वीर सिंह को शक हुआ कि मोबाइल चोरी का है इसलिए उन्होंने इनकार किया. इस बात से नाराज यामीन और यासीन ने चाकू से वीर सिंह पर हमला कर दिया, उनकी हत्या कर दी. गुहा साहब सुना है विद्वान ज्यादा संवेदनशील होते हैं. यकीनन आप वीर सिंह के परिवार के दर्द को महसूस कर पाएंगे. रामचंद्र गुहा साहब आधुनिक भारत के सबसे नामचीन इतिहासकार हैं. हमें भरोसा था कि वो इतिहास में अपनी कल्पना की मिलावट नहीं करते होंगे. इसलिए हम हिंदू पाकिस्तान वाली उनकी थ्योरी के साक्ष्य जमीन पर तलाश रहे थे. इस तलाश में हम वाराणसी पहुंचे. वाराणसी के दालमंडी इलाके में अवैध अतिक्रमण को तोड़ा जा रहा है. यहां कुछ अतिवादी सड़क पर उतर आए. धार्मिक नारे लगाए. पुलिसवालों से धक्का-मुक्की की. अगर भारत में हिंदू मुगलों जैसी बर्बरता कर रहे होते तो क्या अवैध अतिक्रमण हटाने के खिलाफ मजहबी नारे लगते? इससे पहले भी हिंदुओं को कलंकित करने के लिए कई शब्द ईजाद किए गए. भगवा आतंकवाद, हिंदू तानाशाही, हिंदू असहिष्णुता जैसे शब्दों के जरिए हिंदुओं पर लांछन लगाने की साजिश होती रही है. अब रामचंद्र गुहा ने भारत विरोधी शब्दकोष में हिंदू पाकिस्तान वाला नया नैरेटिव जोड़ा है.
पेश कर रहे भारत विरोधी नैरेटिव
रामचंद्र गुहा जी जिसे आप पीड़ित बता रहे हैं ना वो ही धमकी दे रहा है. जिसे आप दूसरे दर्जे का नागरिक बता रहे हैं ना वो एक मुख्यमंत्री को धमकी दे रहा है. ये हिंदू पाकिस्तान के लक्षण नहीं है. ये भारत को कट्टरपंथी पाकिस्तान बनानेवाली सोच का प्रमाण हैं. अफसोस है कि अपने वैचारिक बंधन में आप इस सच को देख नहीं पा रहे हैं. चार्जर नहीं देने पर चाकू मारकर हत्या, अवैध अतिक्रमण हटाने पर सड़क पर कट्टरपंथी नारेबाजी, नई बाबरी बनाने वाली जिद. रामचंद्र गुहा जी ने एक और बड़ी बात कही. इन्होंने कहा,’ भारत में मुसलमानों को सार्वजनिक जीवन से बाहर किया जा रहा है.’ रामचंद्र गुहा साहब यही हेरफेर कर रहे हैं. वो छवि निर्माता हैं. अपने शब्दों से दुनिया में भारत की छवि का निर्माण करते हैं. गुहा साहब बेंगलुरु में रहते हैं. लेकिन उनकी सोच और शब्दों की पहुंच वैश्विक है. इसलिए इन्हें 2001 में अमेरिकन सोसाइटी फॉर एनवायरनमेंटल हिस्ट्री ने सम्मानित किया, 2002 में ब्रिटेन में डेली टेलीग्राफ क्रिकेट सोसाइटी बुक ऑफ द ईयर सम्मान मिला, 2008 में अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने इन्हें दुनिया के टॉप 100 बुद्धिजिवियों की लिस्ट में शामिल किया, 2014 में अमेरिकी येल यूनिवर्सिटी ने इन्हें ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ ह्यूमैनिटीज का सम्मान दिया, 2015 में जापान में इन्हें फुकुओका एशियन कल्चर प्राइज मिला, 2019 में अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन ने इन्हें ऑनरेरी फॉरेन मेंबर बनाया. ये सम्मान बताते हैं कि पश्चिमी देशों में इनके शब्दों का कितना महत्व है. गुहा साहब पश्चिम विचारों के वाहक हैं. ये भारत में भी पश्चिमी मॉडल वाला समाज और पश्चिमी मॉडल वाला लोकतंत्र चाहते हैं. इन्हें मिडल ईस्ट की समस्या नहीं दिखती. इन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रही जंग नहीं दिखती. विस्तारवाद नहीं दिखता. रामचंद्र गुहा जैसे वैचारिक अतिवादियों ने इस लॉ एंड ऑर्डर की समस्या को ही मध्यकालीन बर्बरता और हिंदू पाकिस्तान जैसे भारी भरकम शब्दों से जोड़कर भारत विरोधी नैरेटिव के तौर पर पेश कर दिया. इसलिए दूसरे विद्वान रामचंद्र गुहा की थ्योरी पर सवाल उठा रहे हैं.
देश को कलंकित कर रहे शब्द
जरूरी है कि आज मध्यकालीन बर्बरता और हिंदू पाकिस्तान जैसे शब्दों से भारत विरोधी नैरेटिव बनाने वालों को आईना दिखाया जाए. उदयपुर के कन्हैयालाल को 28 जून 2022 को बर्बरता से मार डाला गया था. मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने गला काटकर उनकी हत्या कर दी थी. सिर तन से जुदा करनेवाले इस सोच को ही मध्यकालीन बर्बरता कहते हैं. 21 जून 2022 को अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी. अक्टूबर 2019 में लखनऊ में कमलेश तिवारी की गला रेत कर, गोली मारकर हत्या कर दी गई. 26 जुलाई 2022 को कर्नाटक में प्रवीण नेत्तारू को तेज हथियारों से हमला कर मार दिया गया. 12 अप्रैल 2025 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ विरोधी प्रदर्शन के दौरान हरगोविंद और उनके बेटे चंदन की हत्या कर दी गई. उसी मुर्शिदाबाद में कई हिंदू परिवारों के घर जला दिये गए, जहां बाबरी मस्जिद बनाई जा रही है. और रामचंद्र गुहा कहते हैं कि हिंदू, मुसलमानों पर शासन कर रहे हैं. रामचंद्र गुहा और उनके जैसे कथित प्रोग्रेसिव सोच वालों की परेशानी ये है कि वो बदलाव को स्वीकार नहीं करते. ये ठीक है कि इन बुद्धिजीवियों को शासन से नाराजगी हो सकती है. शासन में बैठे किसी व्यक्ति विशेष से दुश्मनी हो सकती है लेकिन क्या अपनी नाराजगी को सही साबित करने के लिए देश को कलंकित करना, उसे हिंदू पाकिस्तान बताना सही है. ये कत्तई सही नहीं है. रामचंद्र गुहा जी, आपको अगर सरकार से, सिस्टम से कोई शिकायत है तो खुलकर नाम लेकर आप बोल सकते हैं. लिख सकते हैं. ये भारत के लोकतंत्र की खूबसूरती है. लेकिन कृपया अपने वैचारिक आग्रहों और कुंठा को भारत विरोधी नैरेटिव का रंग नहीं दें. भारत को हिंदू पाकिस्तान न बनाएं भारत को भारत ही रहने दें.
