
India News: दिल्ली में सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री और यूएई के राष्ट्रपति की मुलाकात की तस्वीरें सिर्फ इस्लामाबाद में नहीं देखी जा रही होंगी बल्कि वॉशिंगटन में मौजूद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की दिलचस्पी भी इस मुलाकात में होगी. व्हाइट हाउस के कर्मचारी भी इस मुलाकात के अपडेट ट्रंप को बता रहे होंगे. आप यह भी जानिए कि आखिर अमेरिका क्यों दिल्ली की तरफ देख रहा है.
ट्रंप की गाजा योजना में UAE मुख्य भूमिका निभा रहा है. ट्रंप ने भारत को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया है. शेख नाहयान की भारत यात्रा से साफ होगा कि भारत गाज़ा पोस्ट-वॉर अरेंजमेंट में क्या और किस तरह की भूमिका निभाएगा.
पूरी दुनिया की थी दौरे पर नजर
UAE और सऊदी अरब के बीच यमन, सूडान और क्षेत्रीय नेतृत्व को लेकर मतभेद हैं. ट्रंप देखेंगे कि UAE भारत को बैलेंसिंग पार्टनर की तरह कैसे इस्तेमाल कर रहा है.
ट्रंप को UAE–भारत निवेश और ट्रेड डील्स यह दिखा सकती हैं कि भारत अमेरिका के टैरिफ दबाव से बचने के लिए कौन से वैकल्पिक आर्थिक रास्ते बना रहा है और यूएई इसमें भारत की कैसे मदद कर रहा है.
भारत और यूएई रुपये-दिरहम में व्यापार को तरजीह दे रहे हैं. भारत के UPI और यूएई के IPP सिस्टम को दोनों देश बढ़ावा दे रहे हैं. यहां से ट्रंप को संकेत मिल रहा है कि कैसे भारत और यूएई व्यापार में डॉलर की निर्भरता धीरे-धीरे घटा रहे हैं.
भारत का बड़ा सहयोगी है UAE
UAE भारत का बड़ा ऊर्जा सप्लायर है. ट्रंप प्रशासन यह देखेगा कि भारत–UAE साझेदारी से ऑयल प्राइस, सप्लाई और OPEC बैलेंस पर क्या असर पड़ सकता है.
भारत से मिडिल ईस्ट के रास्ते यूरोप तक जाने वाला कॉरिडोर यानी IMEC ट्रंप की चीन-विरोधी रणनीति से मेल खाता है. यूएई के राष्ट्रपति की यात्रा से साफ होगा कि भारत–UAE. इस कॉरिडोर के काम को कितनी तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं.
सोचिए अगर भारत-यूएई सहयोग से दुनिया की सुपर पावर के इतने हित जुड़े हैं तो ये साझेदारी दुनिया के लिए कितनी महत्वपूर्ण है. भारत–यूएई का संबंध दुनिया को यह संकेत देता है कि ऊर्जा, निवेश और भुगतान प्रणालियों में स्थिरता और वैकल्पिक रास्ते बन रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार को अनिश्चितता से राहत मिल सकती है. इसके अलावा यूएई ईरान के खिलाफ जंग में ट्रंप का सहयोगी भी है, जहां सऊदी अरब अमेरिका को ईरान पर हमला नहीं करने की सलाह दे रहा है. वहीं यूएई चुपचाप अपना काम कर रहा है. माना जा रहा है कि अमेरिकी सैनिक यूएई से ही इस संभावित हमले की तैयारी कर रहे हैं.
