
DNA Analysis: बांग्लादेश और पाकिस्तान के कट्टरपंथी मिलकर भारत में आतंक फैलाने की साजिश में लगे हैं. ये कट्टरपंथी अपने-अपने देश में हिंदुओं को खत्म करने का मिशन भी चला रहे हैं. लेकिन भारत में भी कुछ कट्टरपंथी हैं जो देश में रहकर हिंदुओं के खिलाफ और देश को तोड़ने के मिशन में लगे हैं.
कट्टरता की हद
ये कट्टरपंथी जिस देश में रहते हैं, वहीं गृहयुद्ध की गीदड़ भभकी देते हैं. आज इन कट्टरपंथियों की वैचारिक मरम्मत जरूरी है. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था- कट्टरपंथी वो है जो अपना विचार नहीं बदल सकता और विषय भी नहीं बदलता. ये कट्टरपंथी बार-बार सामने आते हैं और बार-बार उसी विषय को दोहराते हैं. सेलेक्टिव सोच के शिकार मौलाना साजिद रशीदी ने इस बार अपनी कट्टरता की सारी हदें तोड़ दी हैं. उन्होंने देश में दंगे और गृहयुद्ध की धमकी दी है.
वंदे मातरम् पर हिंसा
मौलाना साजिद रशीदी के मुताबिक वंदे मातरम बोलने के लिए कोई कहे तो हिंसा शुरू कर देनी चाहिए. शाहरुख खान की टीम में बांग्लादेशी खिलाड़ी का कोई विरोध करे तो गृहयुद्ध शुरू कर देना चाहिए. क्या राष्ट्रीय गीत गाने के लिए किसी को कहना अपराध हो सकता है? क्या इस तरह का बयान राष्ट्रीय गीत का अपमान नहीं है? क्या हथियार उठाने की अपील करना अपराध नहीं है? क्या गृह युद्ध की धमकी देना अपराध नहीं है? मौलाना साजिद रशीदी की सोच इतनी सेलेक्टिव है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार पर तो चुप्पी साध लेते हैं. लेकिन फिलिस्तीन के मुद्दे पर भड़क जाते हैं. वंदे मातरम के नाम पर खुलेआम हिंसा की धमकी देते हैं लेकिन मुंबई के सैलून में देश विरोधी गाना बजाने पर खामोश रहते हैं. शाहरुख खान के खिलाफ कोई बोलता है तो इनकी भावना आहत हो जाती है लेकिन जब देश में खुले मंच से जिहाद की अपील की जाती है तो इनकी ज़ुबान पर ताला लग जाता है.
सड़कों पर हिंसा
इन्हें ये सब इसलिए नहीं दिखता क्योंकि इनकी सोच पूरी तरह कट्टरपंथी है. इनके मन-मस्तिष्क में नफरत की मात्रा बहुत अधिक है. मौलाना साजिद रशीदी की गृहयुद्ध की इस धमकी को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है. इनके जैसे लोग अपने ऐसे बयानों से लोगों को सड़कों पर लाने की साजिश रच रहे हैं. आपने देखा होगा. बरेली में इसी तरह मौलाना तौकीर रजा ने आई लव मोहम्मद के नाम पर लोगों को उकसाया था. तौकीर रजा की भड़काऊ तकरीरों के कारण हजारों लोगों की भीड़ सड़कों पर हिंसा के लिए उतर गई थी. पुलिसवालों पर हमला किया गया था. अब मौलाना साजिद रशीदी भी अपने बयानों से उसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. कट्टरपंथ को समय रहते कुचला नहीं गया तो परिणाम बहुत गंभीर और कभी-कभी अनियंत्रित हो जाते हैं.
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