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DNA Analysis: रोटी से तात्पर्य ये है कि बांग्लादेश की प्लेट भारत के बगैर भर नहीं सकती है. उनका एक दिन नहीं गुजर सकता है. गेहूं, चावल, प्याज और दवा से लेकर वो सूती धागा तक हिंदुस्तान से जा रहा है जिसपर बांग्लादेश टिका हुआ है. फिर भी आंखों पर धर्मांधता की पट्टी बांधकर बेदिल बांग्लादेशी हमें ही धमका रहे हैं. प्रश्न है कि कब तक ऐसा होता रहेगा? इसलिए आज हम बांग्लादेश के विश्वासघाती चरित्र और उसपर एक्शन का विश्लेषण करेंगे. एक बहु प्रचलित कहावत है ‘आस्तीन का सांप होना’. आज की तारीख में बांग्लादेश इसी कहावत के समकक्ष खड़ा है. हिंदुस्तान का भेजा हुआ अन्न खाकर. यहां की दी हुई बिजली से अपना मोबाइल और लैपटॉप चार्ज करके विषैले बांग्लादेशी भारत के खिलाफ लिखते हैं, बोलते हैं. 

धार्मिक नियमों की सख्ती
आज जब समूचा बांग्लादेश अराजकता की प्रयोगशाला बना हुआ है, तो उसमें जेन-यू  तैयार हो रहे हैं. जेन-यू का मतलब जेनरेशन उन्मादी. हम आपको एक नए जेन-यू के बारे में बताना चाहेंगे, जो स्वयं बता रहे हैं कि उनका आदर्श वो शख्स है, जो धार्मिक रूप से कट्टर था. हमने आपको अपने कल के एडिशन में बताया था कि कैसे बांग्लादेश का जेन-यू खुदीराम बोस और चंद्रशेखर आजाद को नहीं मानता. आज उसने बताया है कि उसका आदर्श तितुमीर है. ये तितुमीर कौन था, वो भी आपको जानना चाहिए. तितुमीर एक नंबर का कट्टरपंथी था. अपनी कौम के लोगों को भड़काता था. मुस्लिमों को अलग पहचान देने के लिए जिहाद की वकालत करता था.  वो अपने धार्मिक नियमों को सख्ती से लागू करने का पक्षधर था. इतना ही नहीं उसने 19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हिन्दुओं के खिलाफ एक अभियान का नेतृत्व भी किया था. 

हादी की हत्या
बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों की दीवारों पर, नौसेना के बेस पर, ट्रेनों के नाम पर और डाक टिकटों में नायक के तौर पर जिंदा है. जबकि शेख मुजीबुर्रहमान की निशानियों को मिटाया जा रहा है. लेकिन तितुमीर इसलिए जिंदा है क्योंकि उसने हिंदुओं के खिलाफ तलवार उठाई थी. यही तितुमीर बांग्लादेश के जेन-यू  मतलब जेनरेशन उन्मादी का पथ प्रदर्शक है. तितुमीर जैसे अतिवादी को अपना आदर्श मानने वाला बांग्लादेश का जेन-यू वही कर रहा है, जो कट्टरता की पराकाष्ठा की श्रेणी में आता है. शरीफ उस्मान हादी मीर भी तितुमीर को ही अपना हीरो मानता था और जिस हत्यारे ने अतिवादी हादी की हत्या की, वो भी तितुमीर को ही मानने वाला है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता निलोफर चौधरी का कहना है कि जिस फैसल करीम मसूद ने हादी पर गोली चलाई, उसे कट्टपरंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने जेल से बाहर निकलवाया था. 

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फैसल करीम मसूद 
जमात के सीनियर नेता और वरिष्ठ वकील शिशिर मनीर ने शूटर फैसल करीम मसूद को 2 बार जमानत दिलवाई थी. एक जमानत तो कुछ ही महीने पहले भी दिलवाई थी. उन्होंने कहा कि एक बार तो फैसल करीम मसूद 17 लाख रुपये के साथ पकड़ा गया था. ये दावा बहुत ही महत्वपूर्ण है. क्योंकि 12 दिन हो गए हैं, अब तक शूटर फैसल करीम मसूद का कोई अता-पता नहीं है. बांग्लादेश की एजेंसी क्यों नहीं पकड़ पा रही है? या पकड़ना ही नहीं चाहती है. जो भी है, लेकिन एक दूसरा सच ये है कि एक बांग्लादेश कट्टरपंथी ने दूसरे बांग्लादेश कट्टरपंथी की हत्या कर दी. लेकिन जब उस हत्या की प्रतिक्रिया हुई तो टारगेट पर भारत है. वो दीपू दास नाम का हिंदू था जिसे भीड़ ने मार दिया. जिसकी हत्या पर वैश्विक स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दीपूदास की हत्या पर बांग्लादेश की सरकार को फटकार लगाई है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देना जरूरी है.  भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णामूर्ति ने मांग की है. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और हत्या की पारदर्शी जांच की जाए. वहीं न्यूयॉर्क विधानसभा की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने बांग्लादेश की हिंसा को हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा बताया है. भारत सरकार ने भी दीपू हत्याकंड की जांच कराने और न्याय देने के लिए कहा है.

प्याज का निर्यात 
लेकिन बांग्लादेश के जेन-यू में एक अलग ही लेवल का हिंदू और हिंदुस्तान विरोधी ज्वार उठा हुआ है. विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि बांग्लादेश में भारतीय दूतावास के लिए एक स्पष्ट सुरक्षा खतरा है. फिर भी भारत धैर्य दिखा रहा है. एक विशाल देश होने के नाते ना सिर्फ धैर्य दिखा रहा है कि बल्कि विष वमन करने वालों के लिए खाने पीने का सामान भी भेजा जा रहा है. ट्रकों में प्याज की बोरियां लदी हुई है. भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर प्याज लदे ट्रक खड़े हैं. इन्हें बांग्लादेश ही भेजा जाना है.सिर्फ प्याज ही नहीं, भारत से इतने तरह से सामान निर्यात होते है, जो बंद हो जाएं, तो बांग्लादेश में आफत आ जाएगी. बांग्लादेश में जो कट्टरपंथी भारत विरोधी नारे लगा रहे हैं, उनकी थाली खाली हो जाएगी, उनकी कमाई बंद हो जाएगी. बांग्लादेश रेडीमेड कपड़ों की इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस इंडस्ट्री के लिए जो सबसे जरूरी सामान यानी धागा है वो भारत से जाता है. बांग्लादेश अपनी जरूरत का 95% धागा भारत से लेता है 95% अगर भारत ने धागा देना बंद कर दिया, तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. 

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भारत की वजह से चल रहा बांग्लादेश 

बांग्लादेश अपनी जरूरत का 45% प्याज भारत से लेता है. अगर भारत ने प्याज भेजना बंद कर दिया तो बांग्लादेशियों की थाली का स्वाद गायब हो जाएगा. बांग्लादेश में जो दवाइयां बनती हैं. उनका एक तिहाई यानी 30% कच्चा माल भारत से जाता है. सोचिए अगर भारत ने ये भेजना बंद कर दिया तो बांग्लादेश में कैसी त्रासदी आ जाएगी. अगर भारत ने बांग्लादेश के साथ व्यापारिक रिश्तों को खत्म कर दिया तो इसका असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर दिखेगा. बांग्लादेश की GDP 1 से 2 प्रतिशत तक गिर जाएगी. बेरोजगारी 10 फीसदी तक बढ़ जाएगी. बांग्लादेश में जो कट्टरपंथी अपना गला फाड़ कर भारत विरोधी नारे लगा रहे हैं, उन्हें ये आंकड़े आज देखने चाहिए. ये समझना चाहिए कि भारत की वजह से ही उनका मुल्क चल रहा है. भारत की वजह से ही उनका देश अस्तित्व में आया था और इसलिए इन कट्टरपंथियों को भी भारत का शुक्रगुजार होना चाहिए.