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DNA Analysis: वंदे मातरम से परेशान होने वाले ये वही लोग हैं, जो बाबर के अनुयायी हैं. बाबर का नाम सुनकर इन्हें ठंडक मिलती है. दिल का दर्द कम हो जाता है. इनके खून में जोश का नया संचार होने लगता है. ये जोश हमें पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में दिखा, जहां आज से बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू हो गया. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर की अगुवाई में बाबरी बननी शुरू हुई है इसकी नींव 6 दिसंबर 2025 को रखी गई थी. यानी नींव रखने के 66 दिनों के बाद मस्जिद निर्माण आरंभ हुआ है. मस्जिद निर्माण के लिए तीन साल का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन निर्माण कंपनी के साथ हुए समझौते के अनुसार अब ये काम 2 साल में पूरा करने का दावा किया जा रहा है.

हुमायूं को बाबरी बनाने की कितनी जल्दी है, ये आप समझ सकते हैं. हुमायूं कबीर का दावा है कि 31 मार्च 2028 से पहले हर हाल में बाबरी मस्जिद बेलडांगा में बन जाएगी. लोग एक बार फिर से बाबर के नाम पर बनी मस्जिद में नमाज़ पढ़ेंगे. अयोध्या से 868 किलोमीटर दूर बेलडांगा में मस्जिद के निर्माण की शुरुआत का गवाह बनने के लिए हजारों की भीड़ जुटी थी. लेकिन ये भीड़ पहले की तुलना में कम थी.

6 दिसंबर को शुरू हुआ था मस्जिद निर्माण का काम 

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6 दिसंबर को नींव वाले दिन.. 40 से 50 हज़ार लोग बेलडांगा पहुंचे थे, वहीं आज यानी बाबरी निर्माण वाले दिन, ये संख्या 25 से 30 हज़ार के बीच रही. लोगों की संख्या भले आधी हो गई हो लेकिन बाबर और बाबरी मस्जिद के नाम का जो सांप्रदायिक जहर कट्टरपंथियों के भीतर है, वो ज़रा भी कम नहीं हुआ है. आपको आज उन लोगों को सुनना चाहिए जो बाबर के नाम पर मस्जिद बनने से बहुत ख़ुश हो रहे हैं.

बाबर को लेकर इनके मन में क्या चल रहा है. हुमायूं कबीर ने जो पाठ पढ़ाया है, उसका असर साफ तौर पर इनकी बातों में दिखता है. कोई बाबरी मस्जिद को अपनी शान बता रहा है तो कोई बाबर को ज़िंदा रखने की बात कर रहा है. किसी के दिल को ठंडक मिली तो किसी के लिए आज बेहद ख़ुशी का दिन है. सोचिए एक विदेशी आक्रांता के लिए कितना प्यार इन कट्टरपंथियों के दिल में है. जो बाबर क्रूरता और धार्मिक असहिष्णुता का दूसरा नाम है, उसको ज़िंदा रखने की बात करने वालों, उसको अपना आदर्श बताने वालों की मानसिकता आप समझ सकते हैं. 

  •  6 दिसंबर की तरह इस बार भी बेलडांगा में एक बड़ा मंच सजाया गया था. इस मंच पर एक हज़ार से ज़्यादा मौलवियों और मुफ्तियों ने क़ुरान का पाठ किया. 

  • इसके बाद दोपहर 12 बजे बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू हुआ. धार्मिक नारों के बीच हुमायूं कबीर मौक़े पर पहुंचे.

  • वहां उन्होंने मस्जिद के निर्माण की शुरुआत की. भीड़ ने बाबरी मस्जिद के समर्थन में नारेबाज़ी भी की.

  • इस दौरान हुमायूं कबीर ने मस्जिद का विरोध करने वालों को भी जवाब दिया.

मस्जिद के निर्माम के मौके पर पहुंचे हजारों लोग 

बाबरी मस्जिद के निर्माण के मौक़े पर मुर्शिदाबाद के अलावा नदिया और मालदा से भी हज़ारों लोग पहुंचे थे. कई लोग ऐसे थे जो बाबरी मस्जिद के लिए ईंट अपने सिर पर ढोकर लाए थे. बाबर के नाम पर मस्जिद का उत्साह इतना था कि वो किसी भी तरह इसका हिस्सा बनना चाहते थे.सिर पर ईंट रखकर लाने वालों के अलावा बहुत से लोग नई बाबरी मस्जिद का मॉडल लेकर भी आए थे. जो सपना हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के नाम पर इन्हें दिखाया है, उसका मॉडल बनवाकर वो यहां पहुंचे थे. साथ ही बाबर और बाबरी मस्जिद का नाम घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी भी की गई थी. यहां बाबरी मस्जिद छपी टी-शर्ट और कॉफी मग भी बेचने के लिए रखे गए थे.

इस नहीं फैलाया गया झूठ 

6 दिसंबर को भी लोग इसी तरह बाबर के नाम पर बेलडांगा पहुंचे थे और उस दिन भी इस तरह की तस्वीरें सामने आई थीं. एक अंतर ये था कि 6 दिसंबर को कट्टरपंथियों की भीड़ से चंदा भी जमा किया गया था लेकिन इस बार चंदा नहीं वसूला गया. इस बार अरब देशों से मौलवियों के आने का झूठ भी नहीं फैलाया गया. हुमायूं कबीर ने अपने बाबरी प्रोजेक्ट में सर्वधर्म सदभाव का दिखावा करने की कोशिश भी की. इस मौक़े पर मुर्शिदाबाद के एक हिंदू पुजारी को भी बुलाया गया और उनसे हुमायूं कबीर को आशीर्वाद भी दिलवाया गया.

 

बाबरी प्रोजेक्ट को लेकर ममता पर बरसी बीजेपी 

बीजेपी ने हुमायूं कबीर के बाबरी प्रोजेक्ट के लिए ममता सरकार पर निशाना साधा है और दावा किया है कि विधानसभा चुनाव के बाद बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी. बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू करने के बाद हुमायूं कबीर अब कल से बाबरी यात्रा पर निकलने वाले हैं.नदिया के पलासी गेट से बेलडांगा तक 22 किलोमीटर की इस यात्रा में 50 हज़ार लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. यानी हुमायूं कबीर नई बाबरी के नाम पर कट्टरपंथियों की भावनाओं को नफरत की आंच पर उबालते रहेंगे. जानते हैं ऐसा क्यों है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिम बंगाल में अप्रैल और मई के महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं. हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाई है. अपने पॉलिटिकल प्रोजेक्ट को कामयाब बनाने के लिए ही हुमायूं कबीर ने नई बाबरी वाले प्रोजेक्ट को लॉन्च किया है.

लेकिन इस बीच हुमायूं कबीर के परिवार को लेकर नया विवाद सामने आया है. पश्चिम बंगाल पुलिस ने ड्रग्स केस में हुमायूं के समधी यानी उनकी बेटी के ससुर शरीफुल इस्लाम की करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है. पुलिस का आरोप है कि शरीफुल इस्लाम ड्रग्स तस्करी के मामले से जुड़े हो सकते हैं. हालांकि हुमायूं कबीर और उनके परिवार ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. अब हुमायूं कबीर ने धमकी दी है कि वो इस मामले में पुलिस को सबक सिखाएंगे. हुमायूं कबीर जो भी सफाई और धमकी दें लेकिन ड्रग्स केस में उनके रिश्तेदार का फंसना उनके लिए एक बड़ा सवाल है. जो लोग उनकी बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, उनके लिे ये चेतावनी की तरह है.

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