
UGC Guidelines: UGC के मुद्दे से जुड़ी सरगर्मी में आज एक बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से आई है. सुप्रीम कोर्ट ने UGC के मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अनुमति दे दी है और कल ही इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होगी. सुनवाई से पहले आज चीफ जस्टिस ने एक अहम टिप्पणी भी की है, जिसमें कहा गया है,’ हमें पता है क्या हो रहा है. सुनिश्चित करें कि याचिका में सभी त्रुटियां हटाई जाएं. हमने इस मुद्दे पर सुनवाई का फैसला किया है.
कोर्ट ने किया सुनवाई का फैसला
त्रुटियां हटाने का निर्देश देकर सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया है कि यूनिवर्सिटी में छात्रों को बांटने के आरोपों से घिरे UGC के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट भी गंभीर है. इसलिए उसने सुनवाई का फैसला कर लिया है. कल देश के शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सफाई दी थी कि नई गाइडलाइंस का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा. इसके बावजूद UGC के मुद्दे पर प्रदर्शन आज भी जारी रहा. इन प्रदर्शनों में छात्र गुटों के साथ ही साथ अलग-अलग वर्गों से जुड़े सामाजिक संगठन भी शामिल हुए थे. कहीं हाथों में पोस्टर लेकर नारेबाजी की गई तो कहीं सिर मुंडवाकर UGC की नई गाइडलाइंस का विरोध किया गया.
मांग के लिए प्रदर्शन
UGC से जुड़े इस मुद्दे पर सत्ताधारी बीजेपी और उसके सहयोगियों में भी अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. बीजेपी के कुछ नेता नियमावली को बदलना चाहते हैं तो सहयोगी दलों के लिए ये नियमावली सही और सटीक है. इस देश के हर नागरिक को संविधान ये अधिकार देता है कि वो अपनी मांग उठाने के लिए प्रदर्शन कर सकता है. अपनी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए अदालत का रुख कर सकता है.
जाति के नाम पर बंट रहा कैंपस
सुप्रीम कोर्ट से इस मुद्दे पर भी समाधान सामने जरूर आएगा लेकिन आज हम एक बार फिर भारत के लोगों से एक ही सवाल पूछेंगे. क्या अच्छा नहीं होता कि देश की ताकत यानी युवाओं को यूनिवर्सिटी कैंपस में जाति के नाम पर बांटने के बजाए एजुकेशन सिस्टम में सुधार कर उन्हें और मजबूत करने की गाइडलाइन लाई जाती.
