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DNA: अब हम एक ऐसे खौफ का विश्लेषण करेंगे, जिसने झारखंड से लेकर असम तक कहर मचा दिया है. एक तरफ, असम में ट्रेन हादसे में 7 हाथियों की मौत हो गई तो दूसरी तरफ झारखंड के ओरमांझी, रामगढ़ और धनबाद में हाथियों का तांडव जारी है. लोग कह रहे हैं कि हाथी अपने साथी की मौत का बदला रहे हैं. क्या बेजुबान जानवर भी बदला लेते हैं? हाथी को तो जानवरों में सबसे समझदार माना जाता है ऐसे में हाथी बदला ले रहे हैं तो जरूर इसके पीछे कोई न कोई बड़ा राज छुपा है.

पिछले कुछ दिनों में सिर्फ रामगढ़ जिले में ही हाथियों ने छह लोगों की जान ले ली है. इनमें से तीन महिला और तीन पुरुष हैं. ऐसी ही एक घटना रांची के ओरमांझी इलाके की है. यहां सुबह अफरा-तफरी मच गई. झुंड से भटका एक हाथी रिहायशी इलाके में घुस आया. फसलें रौंद दीं, दो लोगों को घायल कर दिया. क्या यह सिर्फ एक हमला है, या हाथियों का अचानक किसी बड़े शोक की वजह से फूट पड़ा गुस्सा? 

धनबाद के टुंडी गांव में हाथियों का आतंक
धनबाद के टुंडी में भी रात के अंधेरे में हाथियों ने रामलाल मुर्मू के घर को तहस-नहस कर दिया. घर के अंदर सो रही महिलाएं और बच्चे बाल-बाल बचे. ग्रामीण डरे हुए हैं, मशालचियों की मदद से हाथियों को खदेड़ा जा रहा है, लेकिन दहशत कम नहीं हो रही. हर तरफ एक ही चर्चा है- हाथी बदला ले रहा है. असम में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आकर 7 हाथियों की मौत हो जाना महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. हाथियों के उत्पात पर PCCF यानी प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट पुरुषोत्तम उपाध्याय की यह बात आपको भी ध्यान से सुननी चाहिए.

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हाथी गांवों की ओर क्यों करते हैं अपना रुख?
सवाल ये है कि अगर जंगल में इन्हें दाना-पानी मिल जाता तो ये धान और अनाज के लिए गांव का रुख क्यों करते? जंगलों की कटाई ने इन्हें गांवों में आने को मजबूर कर दिया है. और जब ये गांव आते हैं तो इन्हें मार कर जंगलों की ओर खदेड़ा जाता है. इन्हें खदेड़ने के लिए पटाखे, डंडे, बारूद और कभी-कभी तीर तक इस्तेमाल में लाए जाते हैं. जब जी मीडिया की टीम ने इन ग्रामीणों से बात की तो सुनिए उन्होंने इस बारे में क्या कहा.

क्या हाथी बदला लेते हैं?
हाथी के बारे में कहा जाता है कि वह “कभी कुछ नहीं भूलता” वैज्ञानिकों के अनुसार, हाथियों के स्मृतिपटल में काफी समय तक यादें कायम रहती हैं. इसीलिए यह माना जाता है कि हाथी बदला लेते हैं. किस्से कहानियों में नागिन के बदले की भी बातें काफी सुनी-सुनाई जाती हैं. लेकिन सच्चाई इनसे थोड़ी अलग है. आप हैरान होंगे लेकिन यह सच है कि बदला लेने वाले पशु-पक्षियों की रैंकिंग में कौआ पहले नंबर पर है. वो 17 सालों से भी ज्यादा वक्त तक चीजों को याद रखता है. अगर आपने उसे तंग किया तो वह न केवल खुद आप पर हमला करेगा, बल्कि अपने पूरे झुंड को आपके खिलाफ ‘मार्क’ कर देगा.

कैसे बदला लेते हैं बाघ और चिंपांजी?
दूसरा नंबर बाघ का आता है. बदला लेने में ये बड़े बेरहम होते हैं. रूस में ‘अमूर टाइगर’ की एक सच्ची घटना है जहां एक शिकारी ने बाघ को गोली मारी, तो बाघ ने कई दिनों तक उसका पीछा किया और उसके केबिन में घुसकर उसे मारा. तीसरे नंबर पर चिंपांजी आते हैं. चिंपांजियों का बदला अत्यंत संगठित और राजनीतिक होता है. ये तुरंत बदला नहीं लेते, सही वक्त का इंतजार करते हैं. जब ये अपने दुश्मन को कमजोर देखते हैं तब हमला करते हैं. इसी तरह ऊंट भी साल भर अपने अंदर रोष पाले रहते हैं. अगर मालिक उसे बुरी तरह पीटता है, तो ऊंट सही मौके का इंतज़ार करता है और घातक हमला करता है.

हाथियों को घटनाओं के साथ भावनात्मक संदर्भ भी याद रहता है
जहां तक हाथियों की बात है तो अगर किसी ने उनके परिवार को नुकसान पहुंचाया है, तो वे सालों बाद भी उसे पहचान कर हमला कर सकते हैं. हाथियों को न सिर्फ घटनाएं याद रहती हैं, बल्कि भावनात्मक संदर्भ भी याद रहते हैं. वे आक्रोश की वजह से नहीं, मानसिक आघात की वजह से बदला लेते हैं. हाथियों का ‘बदला’ दरअसल उनका रक्षात्मक व्यवहार है. जब उनके प्राकृतिक रास्ते बंद हो जाते हैं या उनके साथियों की मौत होती है, तो वे पूरे इलाके को ‘खतरा’ मानने लगते हैं और आक्रामक हो जाते हैं.

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