
Bangladesh violence: बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के तांडव ने वैचारिक आतंक का सबसे घिनौना और क्रूर चेहरा दिखाया है. इस आतंक ने उन बौद्धिक बेईमानों का चेहरा भी बेनकाब कर दिया है जो दिखावा तो इस्लामिक आतंक के खिलाफ लड़ने और मानवाधिकारों के संरक्षक होने का करते हैं. लेकिन असल में अपने फायदे के लिए वो कट्टपंथियों के साथ पहली जमात में खड़े नजर आते हैं. भारत विरोधी उस्मान हादी को श्रद्धांजलि देने के लिए बांग्लादेश के अमेरिकी दूतावास ने एक पोस्ट किया जिसमें कट्टरपंथियों के नायक, मानवता के दुश्मन और बांग्लादेश में अस्थिरता के जिम्मेदार हादी को अमेरिका श्रद्धांजलि दे रहा है.
मतलब ये कैसी वैचारिक बेईमानी है. सोचिए दो दिन पहले ट्रंप इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील कर रहे थे. आज उनका देश एक कट्टरपंथी को श्रद्धांजलि दे रहा है. उसी कट्टरपंथी के समर्थक बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं. एक हिंदू की बीच सड़क पर बर्बर हत्या कर दी गई. लेकिन ट्रंप मौन हैं, उनका दूतावास चुप है. मानवाधिकार के चैंपियंस की जुबान को लकवा मार गया. मित्रो इस सलेक्टिव सोच और वैचारिक पाखंड का विरोध भी जरूरी है.
जरूरी है यहूदियों की हत्या पर इस्लामिक आतंकवाद को खतरा बतानेवाले और हिंदुओं की हत्या पर आंखे नीची कर लेनेवालों के चेहरे से मानवता का पाखंड उतारा जाए. उन्हें बताया जाए की इस्लामिक आतंक सिर्फ यहूदियों या अमेरिकियों के लिए खतरा नहीं है. ये पूरी मानवता के लिए खतरा है. एक यहूदी की हत्या जितनी मानवता विरोधी है उतनी ही मानवता विरोधी एक हिंदू की हत्या भी है
मित्रो कट्टरपंथी हादी के उन्मादी समर्थकों ने ढाका में कई मीडिया संस्थानों पर भी हमला किया. प्रथम आलो के दफ्तर में तोड़फोड के बाद आग लगा दी गई. द डेली स्टार के ऑफिस में भी आग लगाई गई.
प्रेस पर हमले ने पश्चिम देशों के कथित मानवाधिकार, प्रेस स्वतंत्रता के समर्थकों की चिंता को सामने ला दिया. 10 देशों के संगठन मीडिया फेडरेशन कॉलिशन ने बकायदा एक प्रेस नोट जारी किया. मीडिया की स्वतंत्रता के नाम पर उम्दा अंग्रेजी में चिंता जताई गई. मीडिया पर हमले की निंदा की गई. कट्टरपंथियों को याद दिलाया गया कि मीडिया को लोगों तक अपनी खबर पहुंचने का अधिकार है, इस नोट ने पश्चिम देशों के वैचारिक कंगाली, सलेक्टिव सोच और एकपक्षीय मानवतावादी विचार की पोल खोल दी.
मित्रो जिस ढाका में प्रेस की इमारत पर हमले को लेकर पश्चिम देश चिंतित हैं. उसी ढाका से 115 किलोमीटर दूर मैमनसिंह जिले में एक हिंदू दीपू चंद्र दास की कट्टरपंथी भीड़ ने पहले पीट-पीट कर हत्या की. फिर बीच सड़क पर उसे को एक पेड़ से लटका कर..आग दी गई.
जानते हैं प्रेस बिल्डिंग में आग लगाए जाने से नाराज पश्चिम देशों ने एक हिंदू की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. किसी भी पश्चिम देश का रिएक्शन दीपू चंद्र दास की हत्या पर नहीं आया. इनके लिए जैसे एक हिंदू की निर्मम हत्या चिंता करने लायक विषय भी नहीं है. ये बिल्डिंग जलाए जाने पर चिंतित होते हैं, लेकिन एक हिंदू की बर्बर लिंचिंग पर इनके मानवीय मूल्य छुट्टी पर चले जाते हैं. सोचिए इनकी सोच कितनी छोटी, संकीर्ण और सलेक्टिव है. हिंदू जैसे इनके लिए अस्तित्व में ही नहीं हैं. इन देशों ने आंख बंद कर ली, उनकी जुबान पर शर्मनाक चुप्पी छा गई. सोचिए ये कितना शर्मनाक है कि ये मीडिया की सुरक्षा की मांग तो करते हैं लेकिन हिंदुओं की सुरक्षा की मांग करना इन्हें सही नहीं लगता.
सड़क पर कट्टरपंथी, निशाने पर हिंदू और भारत विरोधी नारेबाजी
ढाका की सड़कों पर कट्टरपंथियों का उन्माद दिख रहा है. ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान में दिखता है. चुन-चुन कर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान में होता है. कट्टरपंथी भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान में होता है. ढाका में भारतीय डिप्लोमेट्स को निशाना बनाया गया, ठीक वैसे ही जैसे इस्लामाबाद में होता है. यानी कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश को पाकिस्तान बना दिया है. मोहम्मद युनूस के नेतृत्व में बांग्लादेश में भारत विरोधी सोच का मीटर हाई है. फिर हम बांग्लादेश के प्रेम में क्यों डूबे हैं.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शरीफ उस्मान बिन हादी को श्रद्धांजलि दी है. ये वही कट्टरपंथी शरीफ उस्मान बिन हादी है जो बांग्लादेश में भारत विरोधी सोच का चेहरा था. ये वही है जिसने कथित ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा जारी किया था. नक्शे में नॉर्थ ईस्ट के 7 राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाने का अपराध किया था. उसकी पूरी राजनीति भारत विरोध पर टीकी थी. पाकिस्तान के कट्टरपंथी नेताओं की तरह. उसे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड श्रद्धांजलि दे रहा है.
#DNAमित्रों | हादी को किसने मारा मुनीर का नाम आया!.. बांग्लादेश में भारत विरोधी हिंसा का विश्लेषण#DNA #DNAWithRahulSinha #Bangladesh #BangladeshViolence #Violence #Crime #UsmanHadi #Hindus | @RahulSinhaTV pic.twitter.com/HvK4Wv0t4T
— Zee News (@ZeeNews) December 19, 2025
कुछ कथित लिबरल कह सकते हैं कि बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड अपने देश के कथित नेता को श्रद्धांजलि दे रहा है. ये उनका कर्तव्य है. चलिए ठीक है. तो क्या भारतीय होने के नाते हमारा कर्तव्य भारत प्रथम नहीं होना चाहिए.
आज ये सवाल सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. राष्ट्रवादी भारतीय कह रहे हैं की जब बांग्लादेश पाकिस्तान बन गया है. जब बांग्लादेश भारत विरोधी पाकिस्तानी सोच में रंग चुका है तो फिर हमारा क्रिकेट बोर्ड यानी BCCI क्यों बांग्लादेश पर मेहरबान है. क्यों बांग्लादेश के खिलाड़ी IPL में खेल रहे हैं
कोलकाता नाइट राइडर्स ने पूरे 9 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च कर बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिज़ुर रहमान को नीलामी में खरीदा. अब ये बांग्लादेशी भारत की जमीन पर केकेआर की तरफ से खेलेगा. सोचिए जिस बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड नॉर्थ ईस्ट को बांग्लादेश के नक्शे में दिखानेवाले भारत विरोधी को श्रद्धांजलि दे रहा है, उसकी भारत विरोधी सोच का सम्मान कर रहा है. उसी बांग्लादेश के खिलाड़ी पर हम प्यार और पैसा लुटा रहे हैं. कई कथित लिबरल खेल भावना के नाम पर मुस्तफिजुर के लिए ताली भी बजाएंगे. इसे ही वैचारिक दिवालियापन कहा जाता है.
क्या BCCI को भारत प्रेम दिखाते हुए बांग्लादेश के साथ क्रिकेट बैन नहीं करना चाहिए.
क्या आज केकेआर को भारत प्रथम का भाव प्रदर्शित करते हुए मुस्तफिजुर को टीम से बाहर नहीं कर देना चाहिए. मुस्तफिजुर पहले भी सोशल मीडिया पर कई भारत विरोधी पोस्ट को लाइक कर चुका है. इसपर अतीत में विवाद भी हुआ है. जरूरी है कि भारत विरोधी सोच को बढ़ावा देनेवालों को जवाब दिया जाए, उन्हें बताया जाए की जो भारत के खिलाफ सोचेगा, भारत विरोधी सोच का समर्थन करेगा उसे पाकिस्तान की तरह ही बैन किया जाएगा.
