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Bangladesh Violence Against Hindus: भारत और बांग्लादेश मुल्क भले दो हैं, लेकिन कट्टरपंथी के मामले में इनका DNA एक है. अगर इनका DNA एक नहीं होता तो हिंदुस्तान में रहकर हिंदू को धर्म देखकर मारने की धमकी नहीं दी जाती. अगर इनका DNA एक नहीं होता तो हिंदुस्तान में रहकर यहां के एक बड़े मौलाना बांग्लादेश में हिंदू की हत्या को सही नहीं ठहराते. वो ये नहीं कहते कि गाजा में मुस्लिमों के साथ जो हुआ वो नरसंहार है और बांग्लादेश में जो हिंदुओं के साथ हुआ वो नरसंहार नहीं है. यूपी से असम तक कैसे मुट्ठी भर लोगों ने धर्म के नाम पर कट्टरपंथ का बांग्लादेशी-करण कर दिया है. 

भारत के हिंदुओं को बांग्लादेश से क्या मतलब? 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा है कि मानवता की महानता इंसान होने में नहीं, बल्कि इंसानियत दिखाने में है. जानते हैं कुछ लोग इंसानियत भी धर्म देखकर दिखाते हैं. ये कहेंगे कि सभी मनुष्यों के खून का रंग लाल ही होता है, लेकिन जहां इंसानियत के चश्मे से देखने की जरूरत पड़ती है वहां कुछ लोगों को खून में धर्म का रंग दिखने लगता है. भारत में बैठकर करीब 5 हजार किलोमीटर दूर गाजा के गम में इनकी आंखों से आंसू बहने लगता है, लेकिन महज 15 सौ किलोमीटर दूर जब बांग्लादेश में कट्टरपंथी निर्दोष दीपू चंद्र दास की लिंचिंग करते हैं, बीच सड़क पर उनकी बर्बर हत्या करते हैं. शव को लटकाकर आग लगा देते हैं तो इन सलेक्टिव सोच वाले विचारकों के लिए मानवता की परिभाषा बदल जाती है. सिर्फ परिभाषा नहीं बदलती जब इन्हें याद दिलाया जाता है कि मानवता हिंदू और मुसलमान नहीं देखती तो ये कहते हैं कि भारत के हिंदुओं को बांग्लादेश से क्या मतलब. 

बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार 

बांग्लादेश में पहले से ही हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है. ऐसा नहीं है कि हादी की हत्या के बाद ही हिंदुओं का नरसंहार शुरू हुआ है. बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में 11 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है, साजिश रशीदी  इसे नरसंहार कहते हैं. हादी की हत्या के बाद हुए हंगामे में बांग्लादेश के कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के 100 से ज्यादा घर जला दिए, इसे नरसंहार कहते हैं. पिछले एक हफ्ते में बांग्लादेश में हिंदुओं की करोड़ों रुपए की संपत्ति स्वाहा कर दी गई है. इसे धनसंहार कहते हैं. चुन-चुन कर, पहचान पुख्ता कर बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. पूरी दुनिया को बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार दिख रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के सांसदों ने इसपर नाराजगी जताई है. बांग्लादेश में उन्मादियों ने जिन दीपू चंद्र दास की हत्या की वो किसी आतंकी संगठन के समर्थक नहीं थे. एक आम हिंदू और फैक्ट्री मजदूर थे. जिन हिंदुओं का घर चलाया गया वो हमास समर्थकों जैसे बम नहीं बना रहे थे. इजरायल में घुसकर मासूमों की हत्या नहीं कर रहे थे. वो आम और निर्दोष लोग थे, जिन्हें उन्मादी कट्टरपंथियों ने मारा. भारत में एक साल में 100 से ज्यादा प्रदर्शन गाजा के समर्थन में हुए, जिनमें इंडियन पीपल इन सॉलिडैरिटी विद फिलिस्तीन, फ्रेंड्स ऑफ फिलिस्तीन और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं सड़कों पर उतरी थी. ऐसे ही कई संगठन गाजा के लिए मानवता कुलांचे भरती है. वही मानवता बांग्लादेश के नाम पर क्यों अवकाश पर चली जाती है. बांग्लादेश के लिए कोई सड़क पर क्यों नहीं उतरता? 

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तेजी से फैल रहा कट्टरपंथ का वायरस

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है ‘मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है’. भारतीय जो सनातन संस्कृति को जीते हैं वो इसी को मानवता मानते हैं. सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम वाली मानवता को मानती है. इसलिए हमें बांग्लादेश की चिंता है. इस चिंता का आधार आपकी तरह धर्म नहीं है. मानवता है. इसी मानवता को मानते हुए भारत स्वतंत्र फिलिस्तीन का समर्थन करता है. गाजा निवासियों के लिए भारत ने अक्टूबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र के जरिए 30 टन दवाएं और खाद्य सामग्री भेजी और अब भी भेज रहा है. ये कट्टरपंथ वाला वायरस जो है बहुत तीव्रता से फैलता है और दिमाग को बहुत तेजी से अपना शिकार बनाता है. बांग्लादेश में अतिवादियों के उन्माद को देखकर अब भारत में बैठे उनके कुछ वैचारिक बंधु भी कुलबुलाने लगे हैं. सिर्फ कुलबुला नहीं रहे हैं, दूसरों को आतंकित भी कर रहे हैं.

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हिंदू छात्र के साथ मारपीट 

मुकेश बदायूं के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं. मुकेश से कॉलेज के तीन मुस्लिम छात्रों ने मारपीट की. छात्रों के बीच विवाद आम बात है, लेकिन इसके बाद जो हुआ वो खतरे का अलार्म है. कट्टरपंथ का प्रमाण है. गौर से सुनिएगा. पिटाई करनेवाले गुंडों ने मुकेश को काफिर कहा. कहा,’ बांग्लादेश की घटना भूल गए तुम्हें भी जिंदा जला देंगे.’ सोचिए, हिंदुस्तान में रहकर एक हिंदू को जलाकर मारने की धमकी दी जा रही है. शब्दों से व्यक्तित्व और विचार की पहचान होती है. काफिर का मतलब समझते हैं. सरल शब्दों में काफिर मतलब इस्लाम का दुश्मन. ये खतरनाक सोच किसी मदरसे में पढ़नेवाले छात्र की नहीं है. ये मेडिकल कॉलेज में पढ़नेवालों की सोच है. अब आप सोचिए की कट्टरपंथ का प्रसार कहां तक है. और समझिए की ये कट्टरपंथी कैसे ढाका में जो हुआ उसपर मन ही मन खुश हैं. जानते हैं बांग्लादेश में दीपू को मारा गया वैसे ही ये कट्टरपंथी मुकेश को भी मारना चाहते हैं. क्योंकि दीपू को भी काफिर कहकर ही मारा गया था. भारत से बांग्लादेश तक कट्टरपंथियों का DNA एक है. ये खतरनाक है.

गाजा के लिए प्रदर्शन लेकिन हिंदुओं के लिए मुंह बंद 

ये कट्टरपंथी उन्माद कितना खतरनाक है, नफरत का विष कितना जहरीला है इसे समझिए. बरेली में कुछ लोग बांग्लादेश में हो रहे कट्टरपंथी हिंसा के खिलाफ पुतला फूंक रहे थे. पता है क्या हुआ. बांग्लादेश का पुतला फूंके जाने पर कुछ कट्टरपंथियों की भावना आहत हो गई. और कट्टरपंथियों ने एक युवक की पिटाई कर दी. इसी देश में गाजा के समर्थन में कोच्चि से कश्मीर तक कितने प्रोटेस्ट हुए. आए दिन कभी इजरायल के, कभी अमेरिका के, कभी संयुक्त राष्ट्र के पुतले चलाए गए. ये सबकुछ इन्हीं कट्टरपंथियों ने किया, किसी ने इन्हें टोका, बिल्कुल नहीं, किसी ने इन्हें रोका, बिल्कुल नहीं. जब शांति-व्यवस्था के लिए रोका जाता है तो ये कट्टरपंथी संविधान का हवाला देते हैं. अब इनके कट्टरपंथी उफान और वैचारिक पाखंड को समझिए. इन्हें संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी सब अपने हिसाब से डिजायन किया हुआ चाहिए. सरल शब्दों में कहें तो कट्टरपंथी रंग में रंगा हुआ चाहिए, लेकिन दूसरे लोग जब प्रदर्शन करते हैं तो ये मारपीट करते हैं. हिंसा इनके स्वभाव में शामिल हो गई है. इसलिए वैचारिक के साथ ही इनके कानूनी और शारीरीक मरम्मत की आवश्यकता है. और ये हो भी रहा है. 

पुलिस कर रही मरम्मत

असम में दीपू चंद्र दास की लिचिंग को सही ठहरानेवालों की मरम्मत पुलिस कर रही है. असम पुलिस ने हैलाकांडी में 19 साल के इजाजुर रहमान को गिरफ्तार किया है. इस उन्मादी ने वीडियो पोस्ट कर दीपू की हत्या को सांप्रदायिक आधार पर सही साबित करने की कोशिश की थी. असम के ही कामरूप जिले के मोहम्मद शैफ अख्तर अली को गिरफ्तार किया गया. इसने भी सोशल मीडिया पर दीपू की हत्या के समर्थन में वीडियो पोस्ट किया था. सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी कट्टरपंथियों का समर्थन करनेवाले धुबरी के बाबुल हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया है. जरूरी है कि समय रहते इन कट्टरपंथियों का समुचित इलाज किया जाए. इनके दिमाग से कट्टरपंथ का कैथराइसिस कराया जाए और उसे बाहर निकाला जाए. कानूनी तरीके से इन्हें सुधारा जाए. आज क्रिसमस है इसलिए हम इन कट्रपंथियों को मदर टेरेसा का एक कोट बताना चाहेंगे अगर आप किसी की मदद नहीं कर सकते, तो कम से कम उन्हें चोट तो न पहुंचाएं. यही मानवता है. इसी मनवता के लिए हम भारतवासी बांग्लादेशी हिंदुओं की बात करते हैं. इसी मानवता के लिए गाजा में पीड़ितों के मदद करते हैं.