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West Bengal Assembly Elections: मार्च- अप्रैल के महीने में पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव होंगे. इसके लिए चुनाव आयोग से  लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बीच गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा में अपना बजट पेश किया. राज्य सरकार की ओर से कई बड़े ऐलान किए गए. अगर बजट को ध्यान से देखा जाए, तो पता चलता है कि इसको विशेष रूप से आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. सत्तारुढ़ टीएमसी राज्य में वही फार्मुला आजमाने की कोशिश कर रही हैं, जो बीजेपी ने पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में अपनाया था. 

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. बीजेपी वहां पर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. जानकार बताते हैं कि बिहार के चुनाव में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई थी. शायद यही देखते हुए पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने कई बड़े ऐलान आज केवल महिलाओं के लिए किए. हालांकि, महिलाओं के साथ ममता सरकार ने बेरोजगार युवाओं को साधने का भी दांव चला. 

महिलाओं के भरोसे टीएमसी? 

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ये बात जगजाहिर है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था और घुसपैठ को लेकर टीएमसी सरकार हमेशा घिरती रही है. आगामी चुनाव में बीजेपी इसको बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है. लेकिन राज्य की ममता सरकार ने महिलाओं और युवा वाला दांव चल दिया है. सरकार ने गुरुवार को प्रमुख योजना लक्ष्मी भंडार के तहत भुगतान को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया. 

सरकार के इस फैसले स्पष्ट है कि वह महिलाओं को साधने की कोशिश में लगी हैं. देश में पिछले कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई है. इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है. संदेशखाली मामला इसका सीधा उदाहरण है. बीजेपी महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध और लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था को अहम मुद्दा बना रही है. 

महिलाओं के लिए अन्य ऐलान 

केवल एक योजना नहीं, ममता सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि की है. इसके अलावा युवाओं को साधने के लिए बांग्ला युवा साथी नाम की एक नई योजना की घोषणा की, जिसके अंतर्गत 21-40 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने तक या अधिकतम पांच वर्षों तक 1500 रुपये प्राप्त होंगे. राज्य के वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि इस साल विधानसभा चुनाव के बाद अगर हम सत्ता में वापस आते हैं, तो यह परियोजना इस साल 15 अगस्त से शुरू की जाएगी. 21 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण युवाओं को 1,500 रुपये का मासिक भत्ता दिया जाएगा. बयान से स्पष्ट है कि युवाओं को लुभाने की कोशिश की गई है. बंगाल में चुनाव अगले दो महीने में होने हैं और राज्य सरकार इस योजना को तब लागू करेगी, जब उसकी सत्ता में वापसी होगी. 

क्या बीजेपी के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें? 

गौरतलब है कि बीजेपी लगातार बंगाल में कमल खिलाने की कोशिश में है. वर्तमान में बीजेपी के पास विधानसभा में कुल 77 विधायक हैं. साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया था. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी पिछले एक साल में बंगाल में कई बड़े परियोजनाओं का उद्धाटन कर चुके हैं. उन्होंने हर एक रैली में यह भी कहा है कि बंगाल की ममता सरकार केंद्र की परियोजनाओं को प्रदेश में लागू नहीं कर रही हैं. बीजेपी की सरकार बनते ही इन योजनाओं को लागू किया जाएगा. 

इतना ही नहीं बीजेपी घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हुए बंगाल में सरकार को घेरते आ रहा है. आज भी राज्य सभा में पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी घुसपैठियों के लिए न्यायालय का चक्कर लगा रही है. लेकिन ये घुसपैठिए देश के युवाओं का हक खा रहे हैं, आदिवासियों की जमीन लूट रहे हैं. बीजेपी के किसी भी चुनावी ऐलान से पहले टीएमसी ने जो दांव चला है, वह भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. चूंकि, माना जा रहा है कि इस विधानसभा चुनाव में महिलाओं का अहम रोल होगा. ऐसे में बीजेपी को भी महिलाओं को ध्यान में रखते हुए अपने चुनावी समीकरण को सेट करना होगा. 

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कांग्रेस का अकेले लड़ना कितना सही फैसला? 

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आज बंगाल चुनाव को लेकर बैठक हुई. कांग्रेस आलाकमान ने फैसला किया है कि पार्टी राज्य में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. इस बार पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करने जा रही है. ऐसे में साफ है कि बीजेपी को अब टीएमसी और कांग्रेस दोनों से मुकाबला करना है. इससे पहले कांग्रेस और लेफ्ट आपस में सीट शेयरिंग करते आए हैं. पिछले कई चुनावों से लेफ्ट के हाथ एक भी सीट नहीं लग रही है, लेकिन कांग्रेस कुछ सीटों को जीतने में सफल रही है. 

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