India’s military preparations against Pakistan and China: अमेरिका की प्रेशर पॉलिटिक्स को दरकिनार करते हुए, भारत एक बार फिर रूस के साथ एक और बड़ी डील करने जा रहा है. डिफेंस क्षेत्र में भारत रूस के साथ ये 10 हजार करोड़ रुपये की डील करेगा. इस डील में रूस से भारत S-400 में इस्तेमाल होने वाले 288 मिसाइलें खरीदने जा रहा है. डील के लिए डीएसी यानी रक्षा परिषद ने हरी झंडी दिखा दी है.
रूस से एस-400 की 288 मिसाइलें खरीदेगा भारत
DAC यानी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने अब 288 एस-400 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी. इसमें 120 कम रेंज वाली और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें शामिल हैं. बड़ी बात ये है कि ये खरीदारी फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत होनी है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था. एस-400 मिसाइल ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और आर्म्ड ड्रोन्स को रोका था. भारत को अब तक तीन एस-400 सिस्टम मिले हैं. जबकि दो और सिस्टम जून और नवंबर 2026 तक मिल जाएंगे. हालांकि इंडियन एयर फोर्स पांच और एस-400 सिस्टम्स चाहती है.
डील को आगे बढ़ाना यूएस के लिए संदेश
इस डील को आगे बढ़ाकर साफ कर दिया है कि उसकी डिफेंस पॉलिसी पूरी तरह रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित है. इससे पहले भी अमेरिका ने रूस से S-400 डील को लेकर भारत पर CAATSA प्रतिबंधों की चेतावनी दी थी. हालांकि भारत ने अपने सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए कोई समझौता नहीं किया.
बताते चलें कि मौजूदा हालात में भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं. ऐसे में भारत अपने पुराने साथी रूस के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत कर रहा है.
उत्तर और पश्चिम सीमाएं हो जाएंगी सुरक्षित
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से अतिरिक्त 288 मिसाइलों की खरीद भारत की एयर डिफेंस शील्ड को कहीं ज्यादा मजबूत बना देगी. खासतौर पर उत्तर और पश्चिमी सीमाएं और ज्यादा सुरक्षित हो सकेंगी. इसके चलते वहां पर तैनात S-400 सिस्टम दुश्मन के एयर अटैक, मिसाइल स्ट्राइक और ड्रोन वारफेयर को पहले ही चरण में नाकाम करने में सक्षम होंगे.
भारतीय वायुसेना लंबे समय से S-400 सिस्टम की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही थी. अब DAC की मंजूरी के बाद यह डील भारत की वायु सुरक्षा क्षमता को अगले स्तर तक पहुंचा देगी.
