Digvijaya Singh: कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने की बात दोहराते हुए अपनी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट पर उठे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संगठनात्मक यात्रा की सराहना से जुड़ी टिप्पणी के बाद कांग्रेस के भीतर मचे घमासान के बीच सिंह ने साफ किया कि वह सांप्रदायिक ताकतों के कट्टर विरोधी रहे हैं और आगे भी रहेंगे.
RSS-BJP पर दिग्विजय सिंह ने साधा निशाना
शनिवार को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक से पहले दिग्विजय सिंह ने वर्ष 1996 की एक तस्वीर साझा की थी जिसमें प्रधानमंत्री मोदी वरिष्ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी के साथ नजर आ रहे थे. पोस्ट में उन्होंने आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक क्षमता का उल्लेख किया था, जिसे पार्टी के भीतर कई लोगों ने नेतृत्व को संदेश देने के तौर पर देखा. रविवार को सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का आशय भाजपा या आरएसएस की विचारधारा का समर्थन नहीं था. उन्होंने कहा कि मैं उनकी विचारधारा का विरोध करता हूं, लेकिन हर संगठन को मजबूत होना चाहिए. महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ आरएसएस के संबंध का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि गांधी के हत्यारों से कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है.
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सिंह ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य कांग्रेस में किसी को सलाह देना नहीं था, बल्कि संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान दिलाना था. इससे पहले उन्होंने पार्टी में सुधार, विकेंद्रीकरण और व्यावहारिक ढांचे की जरूरत पर जोर दिया था. इस बीच, कांग्रेस के 140वें स्थापना दिवस के अवसर पर सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के संगठनात्मक सुधारों के आह्वान का समर्थन किया. थरूर ने कहा कि संगठन को मजबूत करना जरूरी है और अनुशासन किसी भी राजनीतिक दल की बुनियाद होता है.
