उर्वशी खोना, नई दिल्ली I उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अचानक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति को केवल झटका ही नहीं लगा है बल्कि एक बड़ी राजनीतिक शून्यता भी पैदा हो गई है. सत्ता, संगठन और निर्णय क्षमता- इन तीनों स्तरों पर अजित पवार एक मजबूत केंद्र थे. उनके निधन से जहां शोक की लहर है, वहीं राजनीतिक गलियारों में धीमी लेकिन गंभीर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं कि अब आगे क्या होगा? सवाल सिर्फ उपमुख्यमंत्री पद का नहीं है बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भविष्य का भी है.
16 बैठकों का खेल, 14 निर्णायक
Zee 24 Taas को विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि एनसीपी के एकीकरण को लेकर कुल 16 बैठकें हुई थीं, जिनमें से 14 बैठकें निर्णायक थीं. इन सभी बैठकों की कमान खुद अजित पवार के हाथ में थी. इन बैठकों में अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे शामिल थे. मंगलवार को हुई अंतिम बैठक सबसे अहम रही थी, जिसमें दोनों एनसीपी गुटों को एक साथ लाने पर अंतिम सहमति बन गई थी.
शरद पवार की हरी झंडी
अंतिम बैठक के बाद अजित पवार ने सीधे शरद पवार से मुलाकात की थी और पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी थी. सूत्रों के मुताबिक शरद पवार ने एनसीपी के एकीकरण को स्पष्ट मंजूरी दे दी थी. इतना ही नहीं, परिवार के मुखिया और वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में एकीकरण की जिम्मेदारी भी शरद पवार ने खुद ली थी.
घड़ी चुनाव चिन्ह क्यों?
यह तय किया गया था कि जिला परिषद चुनाव परिणाम के अगले ही दिन एकीकरण की घोषणा कर दी जाएगी. इसी रणनीति के तहत उम्मीदवारों को तुतारी (तुरही) के बजाय ‘घड़ी’ चिन्ह पर चुनाव लड़ने को कहा गया. जुन्नार, शिरूर और खेड़ में घड़ी चिन्ह पर हुआ आक्रामक प्रचार इसका स्पष्ट संकेत था. सूत्र बताते हैं कि पूरा फैसला कानूनी सलाह लेकर किया गया था.
दिल्ली को थी पूरी जानकारी
हां, इस होने वाले घटनाक्रम की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दे दी गई थी. महायुति में रहते हुए भी शाहू–फुले–आंबेडकर विचारधारा को बनाए रखने पर अजित पवार का जोर था और उसी दिशा में एनसीपी को आगे ले जाने का फैसला हुआ था.
रिश्तों में नरमी के संकेत पहले से
– पिछले साल अजित पवार के जन्मदिन पर पूरे परिवार का शरद पवार से मिलना
– इस साल पार्टी कार्यक्रमों में दोनों की साथ मौजूदगी
– खास तौर पर अजित पवार और रोहित पवार का साथ में यात्रा करना. अब पीछे मुड़कर देखें तो ये सभी संकेत बेहद अहम लगते हैं.
सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनावों के बाद एकीकरण की प्रक्रिया ने और रफ्तार पकड़ ली थी. वह सवाल जो बिना बोले पूछा जा रहा है कि आज अजित पवार नहीं हैं लेकिन एनसीपी का एकीकरण पूरी तरह तय, योजनाबद्ध और तुरंत लागू होने के लिए तैयार था. आज अजित पवार नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा तय की गई एनसीपी एकीकरण की दिशा महाराष्ट्र की राजनीति को अगले निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर चुकी है.
अब आगे क्या?
प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि जन भावना है कि सुनेत्रा पवार जी डिप्टी सीएम बनें. कोई उनका विरोध नहीं कर सकता लेकिन सुनेत्रा जी से कोई आधिकारिक बात इस विषय पर नहीं हुई है. परिवार शोकाकुल है. सभी एनसीपी के विधायक मिलकर इस पर बातचीत करेंगे और यही बात सीएम को हमने बताई है.
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