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Atal Bihari Vajpayee: देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिनकी तारीफ विपक्षी पार्टियों के नेता भी करते थे. अटल बिहारी वाजपेयी अपनी वाकपटुता और हाजिर जवाबी के लिए दुनियाभर में चर्चित थे. अटल बिहारी वाजपेयी के सामने तमाम विपरीत परिस्थितियां आईं इसके बावजूद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी, उनका अंदाज भी काफी जुदा था. कई मौकों पर उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की कई नीतियों का खुला समर्थन किया और उनकी तारीफ की साथ ही साथ ये भी बताया कि अगर उस पद पर वो होते तो वो भी वही काम करते.

‘हमने भी ताक पर रखे दृष्टिकोण’
30 साल पहले Zee News के स्टूडियो में सजे ‘आप की अदालत’ में जब उनसे कहा गया कि जब आप विदेश मंत्री बने तो आप बजाय जनसंघ की नीतियों को फॅालो करने के, बजाय सावरकर के सिद्धांतों पर चलने के आपने जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल के सिद्धांतों पर चलना ज्यादा बेहतर समझा, इस पर जवाब देते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा मैं जनता पार्टी का विदेश मंत्री बना था, जनसंघ का नहीं, अन्य दलों ने अपनी बहुत सी बातें छोड़ी, हमने भी अपने कुछ दृष्टिकोण ताक पर रख दिए और जो साझाकार के तौर पर तय हुआ था उसपर अमल किया. 

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‘हम भी करते वही काम’
इसके अलावा आगे कहा कि विदेश मंत्री का जहां तक सवाल है तो गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) की विदेश नीति पर पहले भी आम सहमति रही है. मैनें एक बार लोकसभा में नेहरू के सामने कहा था कि नेहरू हमारे पीएम न होते और स्वतंत्रता के बाद हमें विदेश नीति का निर्धारण करना होता तो हम गुटनिरपेक्षता की ही नीति का निर्धारण करते. 

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नेहरू की नीतियों का किया समर्थन
बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जवाहरलाल नेहरू की कई नीतियों का समर्थन किया, इसमें उनकी गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) की विदेश नीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, शिक्षा और भारत की वैश्विक छवि बनाने के उनके प्रयासों की भी प्रशंसा की थी. इसके अलावा कई मौकों पर उन्होंने नेहरू की आलोचना भी की थी.

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