News in Brief

ग्वालियर. मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस बीमारी ने भी अपनी आमद दर्ज करा दी है. ग्वालियर में व्हाइट फंगस का पहला मरीज सामने आया है. ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में एक 25 साल का युवक ब्लैक फंगस की परेशानी को लेकर अस्पताल पहुंचा था. लेकिन जब यहां डॉक्टरों ने इनकी जांच की तो मरीज में ब्लैक के साथ व्हाइट फंगस भी पाया गया, हालांकि अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने दोनों फंगस का सफल ऑपरेशन कर दिया है. लेकिन इस मरीज की पुष्टि के साथ मध्य प्रदेश में अब व्हाइट फंगस बीमारी भी आ गई है. 

यह है पूरा मामला 
दरअसल, बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले 25 साल के इस युवक को कोरोना हुआ था. ठीक होने के बाद उसकी आंखों मे दर्द और सूजन आने लगी थी उसके बाद उसके डॉक्टरों को दिखाया. जयारोग्य अस्पताल के ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ बीपी नार्वे ने जांच की तो उसमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए. इसके बाद जांच की गई तो पता चला कि उसे व्हाइट फंगस भी है. हालांकि डॉक्टरों ने युवक का इलाज शुरू कर दिया है. 

एमपी में तेजी से बढ़ रहे हैं ब्लैक फंगस के मरीज 
मध्य प्रदेश में लगातार ब्लैक फंगस के कई मरीज सामने आ रहे हैं. लेकिन यह पहला मरीज है जिसमें ब्लैक और व्हाइट फंगस दोनों एक साथ मिले हैं. इनके लक्षण एक जैसे होते हैं. डॉक्टर के मुताबिक अगर किसी मरीज में ब्लैक फंगस है तो उसमें व्हाइट फंगस भी पाया जा सकता है. यह व्हाइट फंगस ज्यादातर कान में पाया जाता है और नाक की अपेक्षा कान में ज्यादा खतरनाक नहीं होता है. 

ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षण 
ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ बीपी नार्वे का कहना है कि ब्लैक फंगस के समान ही व्हाइट फंगस होता है और इसके लक्षण भी समान होते हैं. शुरुआत में मरीज की आंखों के सामने सूजन आना, सुन्न होना, आंखे लाल होना है. अगर यह नाक में होता है तो इसके लक्षण शुरुआती तौर पर नाक बंद होना, नाक में पानी आना है. इसके साथ जैसे यह लक्षण ब्रेन में पहुंचता है तो सिर दर्द के साथ साथ मरीज बेहोश भी हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि अगर कोविड से ठीक होने के बाद किसी भी मरीज में इस तरह के लक्षण दिखते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए. 

ग्वालियर में 80 से ज्यादा ब्लैक फंगस के मरीज 
ग्वालियर में भी तेजी से ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं. जिले में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 80 के ऊपर पहुंच चुकी है और लगातार यह संख्या तेजी से बढ़ रही है. इनमें से 35 मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं. डॉ नार्वे के मुताबिक डायबिटीज, कैंसर, किडनी रोगी और अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीजों में व्हाइट फंगस की ज्यादा संभावना रहती है.

ये भी पढ़ेंः इस आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बना ली है कोरोना की ‘जादुई’ दवा? सरकार हैरान, ICMR से मांगी रिपोर्ट

WATCH LIVE TV