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दतियाः गामा पहलवान, यह नाम कुश्ती के क्षेत्र में जब भी लिया जाता है हमेशा अदब और सम्मान के साथ लिया जाता है. क्योंकि गामा पहलवान कुश्ती की दुनिया की वह शख्सियत थे जिनका आज भी कोई सानी नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गामा पहलवान का मध्य प्रदेश से विशेष नाता है. 22 मई 1878 को गामा पहलवान का जन्म दतिया में हुआ था. हालांकि उनके जन्म को लेकर विवाद है और कुछ लोगों का कहना है कि गामा पहलवान का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ. बताया जाता है कि दतिया के तत्कालीन राजा भवानी सिंह ने गामा को कुश्ती के क्षेत्र में बढ़ावा दिया. पहलवानी की सुविधाओं से लेकर उनके खानपान का इंतजाम किया गया. गामा पहलवान की पुण्यतिथि पर दतिया के एक युवा हरीश तिवारी ने एक डॉक्यूमेंट्री जारी की है. इस डॉक्यूमेंट्री को अब तक यू-ट्यूब पर 40000 से ज्यादा लोगों ने देखा है. गामा पहलवान की यह  डॉक्यूमेंट्री लोगों को खूब पसंद आ रही है. 

दतिया में था गामा पहलवान का ननिहाल 
देश के साथ विदेश में भी उस समय के नामी पहलवानों से कुश्ती लड़ी. लेकिन कोई भी पहलवान उन्हें पराजित नहीं कर सका. गामा पहलवान का अखाड़ा वीर सिंह पैलेस में आज भी दतिया में मौजूद है. दरअसल, गामा पहलवान का ननिहाल दतिया में था. दतिया स्थित वीरदेव महल में एक अखाड़ा है, जिसमें गामा पहलवानी के दांव-पेंच सीखते थे. 

गामा पहलवान को रुस्तम-ए-हिंद’ के नाम से भी जाना जाता है 
रुस्तम-ए-हिंद’ के नाम से फेमस गामा पहलवान एक दिन में 5000 बैठक और 1000 से ज्यादा पुशअप लगाने के लिए जाने जाते थे. वह दुनिया में कभी किसी भी पहलवान से नहीं हारे. उनके चेहरे पर गजब का तेज था. इनके बचपन का नाम गुलाम मुहम्मद था और इन्होंने महज 10 साल की उम्र में ही पहलवानी शुरू कर दी थी. गामा अपने 52 वर्ष के करियर में कभी कोई मुकाबला नहीं हारे.

पत्थर के डम्बल से बनाई थी बॉडी 
आपको जानकार हैरानी होगी कि गामा ने पत्थर के डम्बल से अपनी बॉडी बनाई थी. फेमस मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली भी गामा से बेहद प्रभावित थे. गामा शरीर के साथ जितनी मेहनत करते थे उनकी डाइट भी वैसी ही थी. जिसे पचाना आम इंसान के बस से बाहर है. गामा डाइट में 6 देसी चिकन, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी और बादाम का शरबत और 100 रोटी लेते थे. गामा के पिता मुहम्मद अजीज बख्श भी पहलवान थे. ऐसे में उन्हें बचपन से ही पहलवानी का शौक था. कहा जाता है कि गामा पहलवान ने एक बार 1200 किलो के पत्थर को उठाकर कुछ दूर चलने का कारनामा कर दिखाया था.

450 पहलवानों के बीच गामा ने दिखाया था अपना दम 
5 फुट 7 इंच के हाइट वाले गामा पहलवान ने उस दौर में विश्व के लगभग हर लंबे पहलवान को धूल चटाई थी. रहीमबख्श सुल्तानीवाला पहलवान को मात देने के बाद गामा पहलवान का नाम भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में फेमस हो गया था. इसके बाद गामा पहलवान ने दुनियाभर में अपनी ताकत का लोहा मनवाया और लंदन में तत्कालीन विश्व चैंपियन पहलवान स्टैनिस्लॉस जैविस्को से सामना हुआ. हालांकि वह मुकाबला बराबरी पर छूटा था. गामा पहलवान ने उस वक्त दुनिया के कई बड़े पहलवानों को धूल चटाई और कभी नहीं हारे. 

बंटवारे के वक्त पाकिस्तान चले गए थे गामा पहलवान 
गामा पहलवान आभिवाजित भारत में जन्में थे. लेकिन भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय ही गामा पहलवान अपने परिवार के साथ लाहौर चले गए थे. गामा पहलवान ने कुश्ती की शुरुआती बारीकियां मशहूर पहलवान माधो सिंह से सीखीं. इसके बाद उन्हें दतिया के महाराजा भवानी सिंह ने पहलवानी करने की सुविधाएं दी. जिससे उनकी पहलवानी में गजब का निखार आ गया. हालांकि कहा जाता है कि पाकिस्तान जाने के बाद भी वह दतिया आते रहते थे. क्योंकि पहलवानी के शुरूआती गुण दतिया में सीखने की वजह से उन्हें यहां से विशेष लगाव था. जैसा कि हरीश ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाया है. गामा पहलवान की मृत्यु 23 मई 1960 को लाहौर पाकिस्तान में हुई थी. गामा का परिवार आज भी पाकिस्‍तान में रहता है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की दिवंगत पत्‍नी कुलसुम नवाज गामा की ही पोती थीं.

हरीश ने इस तरह बनाई गामा पहलवान पर डॉक्यूमेंट्री 
दरअसल, दतिया में रहने वाले हरीश तिवारी लंबे समय से गामा पहलवान पर रिसर्च कर रहे थे. हरीश ने बताया कि गामा पहलवान दतिया के रहने वाले थे. उनका लालन पोषण दतिया में हुआ था. वैसे तो दतिया में गामा को लेकर कई किस्से प्रचलित है लेकिन गामा की डैथ एनीवर्सरी पर हनुमान गढ़ी के पास रहने वाले दतिया के युवा हरीश तिवारी ने उन पर 20 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री बनाकर यू ट्यूब पर रिलीज की है. हरीश के मुताबिक साल 2016 से वह लगातार इस विषय पर काम कर रहे थे. चार साल की मेहनत के बाद वह गामा के संबंध में आवश्यक साक्ष्य जुटा पाए. फिर धीरे धीरे डॉक्यूमेंट्री बनानी शुरू की. हरीश ने बताया कि रिलीज होते ही गामा पहलवान पर बनाई गई उनकी यह  डॉक्यूमेंट्री लोगों को पसंद आ रही है. 

डॉक्यूमेंट्री के लिए हरीश ने खुद सीखी एडीटिंग 
हरीश ने बताया कि गामा पहलवान पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए उन्होंने खुद इसके लिए उन्होने खुद एडीटिंग भी सीखी और कई अंग्रेजी लेखों को पढऩे के बाद उनका हिंदी में अनुवाद किया. हरीश का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री बनाने का उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि दतिया और गामा के बारे में पूरी दुनिया जानें. हरीश का शहर के लोगों से अनुरोध है कि वह यू ट्यूब पर जाकर इस स्टोरी को अधिक से अधिक सब्सक्राइब कर उनका उत्साह बढ़ाएं. हरीश ने कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री में आपको गामा पहलवान के जीवन से जुड़ी हर चीज देखने को मिल जाएगी. बता दें कि हरीश इससे पहले भी स्वच्छ भारत सहित अन्य विषयों पर डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं.

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