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Jammu Kashmir Assembly: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटे अब 7 साल होने वाले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को मंजूरी दे दी. लेकिन कुछ लोग अभी तक इस फैसले को पचा नहीं पाए हैं. चिंता करने वाली बात ये है कि 370 से सहानुभूति रखने वाले कई लोग जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में भी बैठे हैं. शनिवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 370 की वापसी के नाम पर एक खतरनाक विचार पेश किया गया. जिस संविधान ने हमारे देश को जोड़कर रखा है, जिस संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं, जो संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है, उसे हटाने की बात की गई.

अलग संविधान की मांग करने वाले, 370 की वापसी की बात कहने वाले ये विधायक सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस यानी NC के हैं या सत्ताधारी पार्टी को समर्थन देते हैं. सरकार में रहकर अलग संविधान की बात कहना और भी गंभीर है. 370 से सहानुभूति रखने वाले जम्मू-कश्मीर के विधायक हर राज्य के लिए अलग संविधान और अलग झंडे की वकालत कर रहे हैं. इस देश ने अलग संविधान और अलग झंडे की बड़ी कीमत चुकाई है. जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान और अलग झंडे का नतीजा अलगाववाद के रूप में निकला जो देश की एकता के लिए बड़ा खतरा है.

जम्मू-कश्मीर के विधायक हर राज्य के लिए अलग संविधान की बात कहकर पूरे देश में वैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं. इसलिए आपको ये भी जानना चाहिए कि हम इस सोच को देश के लिए खतरनाक क्यों कह रहे हैं. अगर अलग संविधान की बात मानी गई तो राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर खतरा होगा. अलग संविधान होने से राज्य अपनी संप्रभुता का दावा कर सकते हैं.

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कानूनी और संवैधानिक अराजकता पैदा हो सकती है. एक ही नागरिकता, एक ही न्यायपालिका, एक ही मौलिक अधिकार. ये सब खत्म हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्चता खत्म हो सकती है. आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियां पैदा होंगी.

यानी अलग संविधान होने से देश कमजोर होगा, विभाजन की आशंका बढ़ेगी, आर्थिक अस्थिरता आएगी और राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ेगी. ये सब सोचकर ही हमारे संविधान निर्माताओं ने पूरे देश के लिए एक संविधान बनाया था. जम्मू-कश्मीर को अस्थायी रूप से कुछ वर्षों के लिए छूट दी गई थी. लेकिन इसे उन्होंने अपना अधिकार समझ लिया. अलग संविधान के नाम पर देश से अलगाववाद की भावना को जम्मू-कश्मीर में बढ़ावा दिया गया. और अब जब जम्मू-कश्मीर को मिली ये छूट खत्म हो गई है तो राज्यों के लिए अलग संविधान के नाम पर पूरे देश को अलगाववाद और अस्थिरता में झोंकना चाहते हैं.