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पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब पर पिछले दिनों इतना हंगामा हुआ कि संसद का सत्र ठीक से नहीं चल सका. अब उन्होंने एक नई किताब लिखी है. कुछ घंटे पहले एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि आपने पहले ही कहा था कि एक इंच जमीन भी चीन के कब्जे में नहीं गई है? क्या आप उस बयान पर कायम है तो जनरल नरवणे ने कहा कि मुझे लगता है कि आपको रिवर्स क्वेश्चन चाइनीज से पूछना चाहिए कि क्या उन्होंने किसी भारतीय जमीन पर कब्जा किया है? जो जवाब मिलेगा, वो उन सभी को संतुष्ट कर देगा जो इस मैटर पर संदेह कर रहे हैं. 

आगे उनसे पूछा गया कि एक आर्टिकल में आपके हवाले से लिखा गया है कि आपको प्रधानमंत्री का कथित तौर पर निर्देश मिला कि जो उचित समझो, वो करो. क्या इसका मतलब था कि आपको प्राइम मिनिस्टर ने खुली छूट दे दी या जो राहुल गांधी कह रहे हैं? इस पर जनरल नरवणे ने कहा कि देखिए हम फिर से उस आर्टिकल की बात नहीं कर सकते जिसमें अज्ञात सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि क्या सही है और क्या गलत है. इसलिए उसे छोड़ दीजिए. जब चीजें स्पष्ट होंगी तब इस पर ज्यादा गहराई से चर्चा करेंगे. 

क्या जनरल नरवणे को अकेला छोड़ दिया गया?

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राहुल गांधी ने दावा किया है कि गलवान संघर्ष के समय बतौर आर्मी चीफ जनरल नरवणे को अकेला छोड़ दिया गया. राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से उन्हें कोई स्पष्टता या सपोर्ट नहीं मिला. जनरल नरवणे से जब यही सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कोई, कुछ भी कह सकता है. मैं कॉमेंट करने के लिए बाध्य नहीं हूं. आगे वह हंसने लगे और कहा कि ये मेरी चिंता नहीं है. 

पिछला छोड़िए, मैंने नई किताब लिखी है…

जनरल नरवणे की किताब पर पब्लिशर ने साफ कर दिया है कि यह छपी ही नहीं है. पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज कर लिया था. अब कुछ घंटे पहले एक इंटरव्यू में जब पूर्व आर्मी चीफ से पूछा गया कि अप्रकाशित किताब पर आपको क्या कहना है तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमें पास्ट (जो बीत गया) में नहीं रहना चाहिए. हमें आगे भविष्य की ओर देखना चाहिए. मैंने एक नई किताब लिखी है- मर्डर मिस्ट्री. मैं उसका अगला भाग लिख रहा हूं. fallback

(डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी के लिटरेचर फेस्टिवल में 19 फरवरी को पहुंचे जनरल नरवणे)

जरूरी नहीं कि सीरियस चीजें ही पढ़ी जाएं…

19 फरवरी को तीसरे डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल हुए पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने कहा, ‘यह जरूरी नहीं है कि सिर्फ सीरियस चीजें ही पढ़ी या लिखी जाएं. कभी-कभी साधारण कहानियां भी दिलचस्प हो सकती हैं… किताब लिखने की इच्छा हमेशा से मेरे मन में थी. अपने करियर के बीच जब भी मुझे खाली समय मिलता, मैं लिखता और इस प्रोसेस का पूरा आनंद लेता. मेरे नॉवेल असल जिंदगी के किरदारों और आर्म्ड फोर्सेज से लिए गए अनुभवों से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं.’