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Stray Dogs Case: देश भर में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पूरी हो गई है. सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में कुत्तों की काटने की बढ़ती घटनाओं और आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से संबंधित मामले में स्वतः संज्ञान लिया था. अब इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. 

गौरतलब है कि इससे पहले देश के शीर्ष न्यायालय ने अधिकारियों को स्कूलों, अस्पतालों और हाईवे जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कई याचिकाकर्ताओं ने इसको चुनौती दी थी और अदालत का रुख किया था. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से निपटने और कुत्तों के हमलों से होने वाली चोटों को रोकने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. 

कोर्ट में इन दलीलों पर हुई सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट में आज इस मामले पर सुनवाई के दौरान एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को ओर से पेश वकील ने कहा कि देश भर में कुत्तों के लिए सेंटर्स बनाए जाने चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड के साथ 76 सेंटर्स रिकग्नाइज्ड हैं. वहीं, 250 से ज्यादा एप्लीकेशन्स पेंडिंग हैं. हालांकि, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह कब से पेंडिंग है, इसके जवाब में बताया गया कि 7 नवंबर के आदेश के बाद कई एप्लीकेशन्स आई हैं. फिलहाल 883 सेंटर्स चल रहे हैं. 

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पशु लवर्स ने क्या कहा? 

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में पर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और डॉग लवर्स की ओर से दलील दी गई कि कुत्तों को मारना या बड़े पैमाने पर हटाना अमानवीय हो सकता है. वहीं, उनका कहना है कि एबीसीसी रूल्स के अंतर्गत  वैक्सीनेशन से समस्या सुलझाई जा सकती है. हालांकि, इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने कुत्तों के काटने से आम नागरिकों की मौत और दुर्घटनाओं का हवाला दिया. वहीं, कोर्ट ने कहा कि सड़कें और सार्वजनिक जगहें सुरक्षित होनी चाहिए. 

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