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Umar Khalid: अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने भारतीय राजदूत से एक्टिविस्ट उमर खालिद के मामले में निष्पक्ष और समय पर सुनवाई की मांग की. इसको लेकर भाजपा की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस पत्र के पीछे भारत विरोधी पैनल से जुड़े हैं. भाजपा अमेरिका के 8 सांसदों की ओर से भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को लिखे गए पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी. 

‘जब भी विदेशों में भारत विरोधी बातें फैलाई जाती हैं…’

भारतीय राजदूत को लिखे पत्र में भारत से साल 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में 5 साल की जेल की सजा काट रहे खालिद को जमानत और निष्पक्ष सुनवाई देने का आग्रह किया गया था. इसको लेकर भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि जेन शाकोव्स्की, जो पत्र लिखने वाले 8 अमेरिकी सांसदों में शामिल थीं. उन्होंने साल 2024 में राहुल गांधी और एंटी इंडिया इल्हान उमर के साथ मुलाकात की थी. बैठक की एक फोटो शेयर करते हुए उन्होंने आरोप लगाया,’ जब भी विदेशों में भारत विरोधी बातें फैलाई जाती हैं, तो एक नाम बार-बार सामने आता है: राहुल गांधी.’  

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राहुल गांधी पर आरोप 

भंडारी ने दावा किया कि साल 2024 में राहुल गांधी से मिलने के बाद शाकोव्स्की ने अगले साल इंटरनेशनल इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने वाला अधिनियम पेश किया, जिसमें भारत का नाम लिया गया और मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई का आरोप लगाया गया. उन्होंने आगे लिखा,’ वही जेन शाकोव्स्की भारत सरकार को पत्र लिखकर उमर खालिद को लेकर चिंता जताती हैं, जो दंगों और हिंसा से जुड़े गंभीर मामलों में UAPA के तहत आरोपी हैं.’ उन्होंने आगे दावा किया कि जो कोई भी भारत को कमजोर करना चाहता है, इसकी चुनी हुई सरकार को बदनाम करना चाहता है और आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करना चाहता है वह गांधी के आसपास इकट्ठा होता दिख रहा है. 

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पत्र में क्या लिखा? 

बता दें कि US हाउस ऑफ रेप्रेजेंटेटिव की सदस्य जेन शाकोव्स्की, राशिद तलैब, भारतीय मूल की कांग्रेसी महिला प्रमिला जयपाल और अन्य लोगों ने खालिद समेत दिल्ली में फरवरी साल 2020 की हिंसा के संबंध में आरोपित व्यक्तियों की प्री ट्रायल डिटेंशन पर चिंता जाहिर की. पत्र में कहा गया,’अमेरिका और भारत एक लॉन्ग टर्म स्ट्रैटजिक पार्टरनर हैं, जो ऐतिहासिक रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक शासन और मजबूत पब्लिक रिलेशन पर आधारित है.’इसमें आगे कहा गया कि दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी होने के नाते दोनों देशों की आजादी, कानून के शासन, मानवाधिकारों और बहुलवाद की रक्षा और उसे बनाए रखने में रुचि है. अमेरिकी सांसदों ने कहा कि मानवाधिकार संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और वैश्विक मीडिया ने खालिद की हिरासत से संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. पत्र में आगे कहा गया,’ खालिद को UAPA के तहत लगाए गए आरोपों के लिए 5 साल से बिना जमानत के हिरासत में रखा गया है, जिसके बारे में इंडिपेंडेंट ह्यूमन राइट एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यह कानून के सामने समानता, सही प्रक्रिया और आनुपातिकता के अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर सकता है.’