Mani Shankar Aiyar Warning to Congress: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर अपनी पार्टी को आईना दिखाने के लिए जाने जाते हैं. एक बार फिर उन्होंने अपनी पार्टी कॉग्रेस के लीडरशिप को आईना दिखाया है. कॉग्रेस का इतिहास बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि जब-जब पार्टी ने आंतरिक मतभेदों और असहमति का सम्मान किया है, तब पार्टी मजबूत हुई हैं. वहीं जब उन्होंने इस मद्दों को दबाने की कोशिश की हैं, वहां पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है.
क्या है कांग्रेस की असली ताकत?
अय्यर ने इस बार पर तर्क देते हुए कहा कि 1885 में क्रांगेस की स्थापना से लेकर आज तक पार्टी के अंतर अलग-अलग विचारधाराओं का मेल रहा है. उन्होंने तिलक, लाला लाजपत राय और गांधीजी के दौर का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी नेताओं के बीच तीखे मतभेद होते थे, लेकिन इसके कारण किसी को बाहर नहीं निकाला जाता था. अय्यर मानते हैं कि विविधता और बहस ही कांग्रेस की पहचान रही है. ऐसे में इस खत्म करने से पार्टी की नींव कमजोर हो सकती है.
इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का जिक्र
वहीं इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का जिक्र करते हुए अय्यर ने बताया कि ये वो दौर था जब कांग्रेस ने असहमति पर पूरी तरह पाबंदी लगाई थी और इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई. लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस ने न केवल हारी, बल्कि इंदिरा गांधी और संजय गांधी को अपनी सीटें तक गंवानी पड़ी. ऐसे में अय्यर ने चतावनी दी कि अगर वर्तमान समय में लीडरशिप पार्टी में हो रही असहमति को बर्दाश्त नहीं कर पाया, तो पार्टी का भविष्य अंधकार में जा सकता है.
वर्तमान लीडरशिप को चुनौती
मणिशंकर अय्यर ने मौजूद हाई कमान पर निशाना साधते हुए बताया कि आज पार्टी में विरोध की आवाज सुनने का साहस कम होता जा रहा है. उन्होंने राजीव गांधी की धर्मनिरपेक्षता वाले विचार को याद करते हुए सवाल किया कि क्या आज की लीडरशिप में वो साहस है? उनका मानना है कि अगर पार्टी अपने ही लोगों के सवालों के जवाब विनम्रता और मजबूती से नहीं दे सकती, तो वे देश पर राज करने की हकदार कैसे बन सकती है.
