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Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार आम बजट लोकसभा में पेश किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को ऐतिहासिक करार दिया है. हालांकि, विपक्ष के नेता इस बजट की आलोचना कर रहे हैं. इस कड़ी में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इस आम बजट को लेकर निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा है. चिदंबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे उन्होंने (वित्त मंत्री) आर्थिक सर्वेक्षण को ठीक से नहीं पढ़ा है या फिर जानबुझकर उसे दरकिनार किया गया है. 

इतना ही नहीं पी चिदंबरम ने यहां तक कह दिया कि वित्त मंत्री के इस बजट भाषण में आर्थिक नीति में दूर्दर्शिता की कमी देखने को मिली. रविवार को केंद्रीय बजट पर बात करते हुए पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. चिदंबरम का कहना है कि आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण में जो कुछ भी सुनने को मिला, उससे अर्थशास्त्र का छात्र हैरान रह गया होगा. उन्होंने कहा कि आम बजट केवल वार्षिक आय और व्यय का बयान नहीं होता है. वर्तमान स्थितियों में बजट का भाषण उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकण पेश करना चाहिए, जिसका जिक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में किया गया था. 

निर्मला सीतारमण पर चिदंबरम का निशाना 

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निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि भारचीय अर्थव्यवस्था इस समय तमाम चुनौतियों से जूझ रही है. बावजूद इसके वुत्त मंत्री ने किसी भी चुनौती का जिक्र अपने भाषण में नहीं किया. कांग्रेस नेता ने कहा कि आज अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ, सकल स्थिति पूंजी निर्माण का कम स्तर और निजी क्षेत्र की पैसा लगाने में निवेशकों की हिचकिचाहट, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर अनश्चितता और पिछले कई महीनों से विदेशी निवेशकों का बाहर जाना, लाखों MSME का बंद होना, युवाओं में बेरोजगारी, लगातार बढ़ रहा शहरीकरण के कारण बिगड़ती बुनियादी ढांचे जैसी कई चुनौतियां हैं. हालांकि, इनमें से किसी पर वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बात नहीं की. 

‘किसी के दबाव में झुक रही सरकार’

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने यहां तक कहा कि सरकार किसी के दबाव के आगे झुक रही है. चिदंबरम ने केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए कोई आवंटन न करने पर केंद्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसी के दबाव के आगे झुक रही है. इस टिप्पणी को अमेरिकी टैरिफ उपायों से उत्पन्न दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है.