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Where to file complaints against Judiciary: हमारे देश के संविधान में कोई अन्याय होने पर प्रशासन या सरकार में शिकायत करने का प्रावधान किया गया है. अगर वहां पर आपकी सुनवाई न हो तो आप कोर्ट की शरण ले सकते हैं. वहीं अगर आपकी शिकायत कोर्ट से ही हो तो आप कहां जाएंगे. यह सवाल आपके मन में भी कई बार आता होगा. आज सरकार ने इस सवाल का जवाब सबको दे दिया और वह तरीका भी बताया, जिसके जरिए जजों की कंप्लेंट की जा सकती है.

9 सालों में जजों के खिलाफ मिली 8600 शिकायतें

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि 2016 से लेकर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट जुडिशरी को कार्यरत जजों के खिलाफ 8600 से ज्यादा शिकायतें हासिल हुई हैं. इनमें सबसे अधिक कंप्लेंट 2024 में मिलीं, जब 1170 शिकायतें CJI के दफ्तर पहुंची.

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कंप्लेंट पर कौन करता है कार्रवाई?

कानून मंत्री ने बताया कि इस तरह की शिकायतों पर कार्रवाई जुडिशरी के “इन-हाउस मैकेनिज्म” के जरिए की जाती है. इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने मई 1997 में व्यवस्था दी थी. इसके तहत हाई कोर्टों के चीफ जस्टिस और अन्य जजों के खिलाफ शिकायतों पर CJI एक्शन लेने में सक्षम हैं. वह ऐसे मामलों की जांच में सुप्रीम कोर्ट के दूसरे जजों का सहयोग भी ले सकते हैं.

इसी तरह जिला अदालतों में कार्यरत जजों के आचरण के खिलाफ हासिल होने वाली शिकायतों पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शिकायत प्राप्त करने और कार्रवाई के लिए सक्षम हैं. वे हाई कोर्ट के अन्य जजों के आचरण के खिलाफ कंप्लेंट अटैंड कर सकते हैं.

एक्शन का अधिकार जुडिशरी के पास – कानून मंत्री

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 1997 में दी गई रूलिंग के बाद उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई और एक्शन का अधिकार जुडिशरी के पास है. यदि सरकार के केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) में जजों के खिलाफ इस तरह की शिकायत आती है तो उसे CJI या संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भेज दिया जाता है.