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PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक संदेश शेयर किया, जिसमें उन्होंने लोगों को नए साल में दृढ़ संकल्प, उद्देश्य की स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि मेरी कामना है कि आने वाले समय में आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिले. दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो.

पीएम मोदी ने एक संस्कृति सुभाषित में शेयर करते हुए लिखा कि ‘उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु। भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः’ उन्होंने शुक्रवार को भारत केसरी मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें याद किया. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर, हम एक महान शख्सियत को बहुत सम्मान के साथ याद करते हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया. वह एक दूर की सोचने वाले व्यक्ति थे जो मानते थे कि सच्ची तरक्की आत्म-सम्मान, बराबरी और समाज सुधार में ही निहित है. हेल्थ, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनका खास योगदान प्रेरणा देने वाला है. उनके विचार हमेशा न्याय, दया और एकता से भरे समाज बनाने की हमारी यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करेंगे.

पिछले दो दिन में प्रधानमंत्री के संदेशों में प्रेरणादायक मार्गदर्शन के साथ-साथ सांस्कृतिक और दार्शनिक विचारों को शेयर किया है. इससे पहले, गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने नए साल के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, समृद्धि व समग्र कल्याण की कामना की. उन्होंने पोस्ट किया कि 2026 की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं. कामना करते हैं कि यह वर्ष हर किसी के लिए नई आशाएं, नए संकल्प और एक नया आत्मविश्वास लेकर आए. सभी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे. वहीं, पीएम मोदी ने सुभाषितम के माध्यम से रेखांकित किया कि जीवन का लक्ष्य ज्ञान, वैराग्य, धन, वीरता, शक्ति, सामर्थ्य, स्मृति, स्वतंत्रता, कौशल, प्रतिभा, धैर्य और कोमलता जैसे गुणों से परिपूर्ण होना है.

जानें कौन हैं मन्नथु पद्मनाभन

मन्नथु पद्मनाभन को ‘केरल का मदन मोहन मालवीय’ कहा जाता था इनका जन्म 2 जनवरी 1878 को हुआ था. वे महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक थे. उन्हें नायर समुदाय के उत्थान और केरल में सामाजिक समानता के लिए उनके योगदान के लिए जाना जाता है. उन्हें भारत केसरी की उपाधि और 1966 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

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मन्नथु पद्मनाभन ने वैकोम सत्याग्रह (1924) और गुरुवयूर सत्याग्रह (1931) में सक्रिय भूमिका निभाई थी जिससे निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश मिल सका. उन्होंने केरल में सैकड़ों स्कूल, कॉलेज और अस्पताल भी स्थापित किए. 1949 में वे त्रावणकोर विधानसभा के सदस्य भी रहे थे. बता दें, मन्नथु पद्मनाभन का निधन 25 फरवरी, 1970 को 92 वर्ष की आयु में हुआ था.