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कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का मुद्दा लगातार उछाल रहे हैं. आज वह संसद में जनरल नरवणे की किताब लेकर पहुंच गए जबकि अभी यह किताब पब्लिश नहीं हुई है. अभी इसे पब्लिशर की ओर से सरकार के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है और काफी समय से यह विचाराधीन है. ऐसे में राहुल गांधी को यह किताब कहां से मिली पता नहीं. हालांकि उन्होंने संसद परिसर में खुलेआम पत्रकारों के इस किताब के पन्ने दिखाए.  

जी हां, आज संसद परिसर में पत्रकारों को इकट्ठा कर राहुल वो किताब दिखाने लगे, जिस पर सदन के भीतर कई दिनों से बवाल मचा हुआ है. विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है. संसद की कार्यवाही चल नहीं पा रही है. राहुल ने दावा किया कि मुझे कहा गया है कि मैं इस बुक को कोट नहीं कर सकता हूं. यहां पर पूरा लिखा है. मेन लाइन है, जो प्रधानमंत्री ने कही है. इसके बाद तमाम कैमरों के सामने राहुल ने एक किताब के पन्ने पलटते हुए एक जगह दिखाते हुए कहा, ‘जो उचित समझो.’ fallback

जनरल नरवणे ने सबको फोन किया लेकिन…

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राहुल ने आगे कहा कि यहां पूरा लिखा है… जब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह जी को फोन किया कि देखिए कैलाश रेंज में चाइनीज टैंक आ गए हैं, हमारी टेरिटरी में… हमें क्या करना है? पहले राजनाथ जी ने रिप्लाई नहीं दिया. उन्होंने जयशंकर जी से पूछा. एनएसए से पूछा. कोई रिप्लाई नहीं मिला. फिर उन्होंने राजनाथ सिंह जी को फोन किया. 

राहुल ने दावा किया, ‘राजनाथ सिंह जी ने कहा कि मैं टॉप से पूछता हूं. राइट, ऑर्डर था, टॉप का ऑर्डर था कि अगर चाइनीज फोर्सेज अंदर आएंगी तो बिना हमारे से पूछे फायर नहीं करेंगे. नरवणे जी और हमारी जो आर्मी थी वो उन टैंक पर फायर करना चाहती थी क्योंकि वो टैंक्स हमारी टेरिटरी में आ गए थे.’

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कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पीएम ने कहा- जो उचित समझो, वो करो मतलब नरेंद्र मोदी जी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की. उन्होंने आर्मी चीफ से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है. नरवणे जी ने साफ लिखा है कि मैं बिल्कुल अकेला पड़ गया था. i was abondoned by establishment. इसके बाद उन्होंने वो किताब दिखाई जिस पर पूरा विवाद आधारित है.