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Devendra Fadnavis on NCP Merger: अजित पवार के प्लेन क्रैश में देहांत से पहले महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों धड़ों में मर्जर की बात कही जा रही थी. इसके लिए 12 फरवरी की तारीख तय होने की बात भी राजनीतिक हलकों में तैर रही थी. अब जब अजित दादा इस दुनिया में नहीं है तो क्या ये प्रक्रिया फिर भी आगे बढ़ेगी. क्या बीजेपी को इस मर्जर का पता है और यह उसकी सहमति से हो रहा है. इन अहम सवालों पर अब राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है. 

‘अजित पवार मुझसे सब कुछ साझा करते थे’

फडणवीस ने कहा, ‘हमें दोनों दलों में कथित मर्जर की 12 फरवरी की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं है. अजित पवार मुझसे सब कुछ साझा किया करते थे. अगर वे चाचा शरद के साथ पार्टी के विलय के बारे में सोच रहे होते तो मुझे जरूर बताते. वैसे भी क्या इस तरह की बातचीत हमारी जानकारी के बिना हो सकती है.’

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महाराष्ट्र के सीएम ने कहा, ‘राजनीतिक दल होने के अजित पवार अपनी पार्टी के लिए कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र थे. लेकिन क्या वे बीजेपी को भरोसे में लिए बिना ऐसा कर सकते थे. जबकि वे प्रदेश की महायुति सरकार में साझेदार थे. जिस सरकार में वे स्थिर थे, क्या वे उसे छोड़ने की तैयारी कर रहे थे.वे मुझसे सब कुछ शेयर करते थे लेकिन इस बारे में हमारी कोई बात नहीं हुई.’

क्या अब टल जाएगा एनसीपी का मर्जर?

बताते चलें कि मुख्यमंत्री का यह बयान शरद पवार के उस बयान के बाद आया है. जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके भतीजे अजित पवार दोनों दलों में एकता चाहते थे. इसके लिए उन्होंने 12 फरवरी की तारीख तय की थी. लेकिन अब उनकी मौत के बाद यह प्रक्रिया शायद रुक सकती है. 

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मुख्यमंत्री फडणवीस ने अजित पवार की पत्नी और पूर्व राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को जल्दबाजी में डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाए जाने पर भी स्पष्टीकरण दिया. उन्होंने कहा कि इसका जवाब एनसीपी ही दे सकती है. उन्होंने ही सुनेत्रा को जल्दी शपथ दिलाने का आग्रह किया था.

‘सुनेत्रा के लिए तुरंत बजट पर काम करना संभव नहीं था’

सुनेत्रा को शपथ ग्रहण के बाद अजित पवार वाले वित्त और नियोजन विभाग न देने पर मुख्यमंत्री ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार अभी नई हैं और इतना बड़ा काम उनके लिए तुरंत संभव नहीं था. बजट केवल भाषण देने का काम नहीं होता. यह एक लंबा प्रोसेस होता है, जिसमें लंबे अनुभव की जरूरत होती है. उन्होंने बताया इस बार असेंबली में वे बजट पेश करेंगे और बजट सेशन के बाद वे वित्त विभाग को लेकर फैसला लेंगे.