
Assam News: असम में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता मिली है. गुवाहाटी स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई. अदालत ने आरोपी को अलग-अलग मामलों में कठोर कारावास की सजा दी, जिसमें अधिकतम सजा उम्रकैद शामिल है. दोषी करार दिया गया आरोपी मोहम्मद कमरुज जमान उर्फ डॉ. हुरैरा उर्फ कमरुद्दीन है.
तीन अलग-अलग मामलों में हुई सजा
अदालत ने उसे तीन अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई, जो साथ-साथ चलेंगी, इनमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 18 के तहत उम्रकैद और पांच साल की साधारण कैद शामिल है.इसके अलावा, अदालत ने तीनों मामलों में आरोपी पर 5,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है, जुर्माना न भरने की स्थिति में प्रत्येक मामले में उसे तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी.
रची थी मॉड्यूल खड़ा करने की साजिश
यह मामला एनआईए द्वारा दर्ज केस संख्या आरसी 08/2018/एनआईए-जीयूडब्ल्यू से जुड़ा है, जो असम के होजाई जिले के जमुनामुख क्षेत्र से संबंधित है. जांच में सामने आया कि वर्ष 2017-18 के दौरान कमरुज जमान ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का असम में एक मॉड्यूल खड़ा करने की साजिश रची थी, इसका उद्देश्य राज्य में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर लोगों के मन में दहशत फैलाना था.
NIA ने दाखिल की थी चार्जशीट
एनआईए की जांच के अनुसार, कमरुज जमान ने इस साजिश के तहत शाहनवाज आलम, सैदुल आलम, उमर फारूक और अन्य लोगों की भर्ती की थी. मार्च 2019 में एनआईए ने इस मामले में कुल पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इनमें से शाहनवाज आलम, सैदुल आलम और उमर फारूक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है. वहीं, पांचवां आरोपी जयनाल उद्दीन मुकदमे के दौरान बीमारी के चलते निधन हो गया था. (आईएएनएस)
