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Chinese Manjha ban in UP: जिसे भी कानून से ऊपर जाकर मनमानी करने की आदत थी, उन्हें योगी आदित्यनाथ की सख्ती अखर रही है. योगी राज में उनकी सांसें फूल रही है. वो सेफ हाउस तलाश रहे हैं. हालांकि योगी आदित्यनाथ की सख्ती सिर्फ कट्टपरंथियों को ही नहीं कानून को चुनौती देने वाले हर शख्स को चुभती है. अवैध रूप से चाइनीज मांझा बेचने वालों पर जब से सख्ती शुरू हुई है तबसे उनकी भी सांसें फूलने लगी है. योगी ने जब से कहा है कि जिनपिंग का मांझा बेचने वालों को कड़ी सजा मिलेगी, तब से शहर-शहर हड़कंप मचा हुआ है.

जनता की जान लेने वाली लापरवाही के विरुद्ध यूपी के सीएम ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे पर नया आदेश दिया. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एक साथ यूपी के सभी ज़िलों में दुकान दर दुकान चाइनीज मांझे की खोज शुरू हुई. सबसे पहले हम आपको दिखाना चाहेंगे कि कैसे चाइनीज मांझे की तलाशी के बाद हड़कंप मचा हुआ है.

हाथ में लटाई. लटाई से धागे तोड़ते पुलिसवाले. ये लटाई खरीदने के लिए धागे की मजबूती नहीं जाँच रहे हैं बल्कि ये धागे को तोड़कर ये परख रहे हैं कि ये सामान्य है फिर जहरीला मांझा. ये गोरखपुर का दृश्य है. जहां ऐसे ही पुलिसवाले तमाम लटाई-पतंग बेचने वाली दुकानों में जाकर जांच पड़ताल कर रहे हैं.

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अब ये तस्वीर देखिए..वाराणसी की. यहां पर वही पड़ताल चल रही है. लटाइयों की टाल से लटाई निकालकर उसके धागों की जांच हो रही है. काशी में दालमंडी गली और पुराने गलियों में मांझे के बड़े व्यापारी हैं. हर जगह पर छापेमारी हुई.

इसी तरह कुछ यूँ जांच-पड़ताल हुई अलीगढ़ की दुकानों में. अलगीढ़ में दुकान-दुकान घूमकर पुलिसवालों ने ये पता लगाने की कोशिश की कि कौन चाइनीज मांझा बेच रहा है. हालांकि जिन-जिन दुकानों में जांच पड़ताल की गई, उनमें से कहीं भी चाइनीज मांझा नहीं मिला.

इसी तरह समूचे प्रदेश में जांचप-पड़ताल चल रही है. पुलिस का कहना है कि जिसके पास भी चाइनीज मांझा मिल गया, उसका जेल जाना तय है.

उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री 2016 से ही प्रतिबंधित है. इसके बावजूद अवैध रूप से दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे दूसरे राज्यों से चाइनीज मांझा लाकर यूपी के बाजारों में बेचा जाता है.

यूपी में प्रतिबंधित होने के बावजूद बाजारों में चाइनीज मांझे की घुसपैठ किस तरह है उसे हम आंकड़ों में बताना चाहेंगे.

बरेली जैसे शहर जो पतंग उद्योग का बड़ा केंद्र हैं, वहां पहले सूती मांझे का सालाना कारोबार लगभग 45 से 50 करोड़ रूपये का हुआ करता था, जो घटकर अब आधा हो गया है. अनुमान है कि चाइनीज मांझे की बिक्री का ये असर है.

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में चाइनीज मांझे का सालाना कारोबार 30 करोड़ रुपये तक का है. जाहिर है कि कुछ लोग अवैध तरीके से चाइनीज मांझा बेचते हैं. जब पुलिस की छापेमारी चल रही थी, उसी दौरान अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पतंग के साथ एक वीडियो पोस्ट किया और उसमें लिखा कि जो कटी पतंग पीछे के घर से आकर गिरी है, उसमें तो चीनी मांझा लगा दिख रहा है. मित्रो चोरी-छिपे बेचे जा रहे है इन चाइनीज मांझे से सिर्फ पतंग नहीं बल्कि जीवन की डोर भी कैसे खतरे में रहता है..उसका भी कुछ आंकड़ा हम आपके साथ शेयर करना चाहेंगे. उत्तर प्रदेश में हर साल चाइनीज मांझे से औसतन 5 से 10 लोगों की मौत हो जाती है, जबकि घायल होने वालों की संख्या सैकड़ों में होती है.  

कुछ ही दिन पहले लखनऊ में मोहम्मद शोएब नाम के एक युवक की मौत हुई थी. जौनपुर में भी एक डॉक्टर की जान चली गई थी.  
यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चाइनीज़ मांझा से हुई मौतों को अब साधारण हादसा नहीं बल्कि हत्या के समान माना जाएगा. साथ ही उन्होंने समूचे प्रदेश में अभियान चलाने के लिए कहा. मित्रो अब हम आपको चाइनीज मांझे के बारे में कुछ अतिरिक्त जानकारी भी देना चाहेंगे.

अधिकांश चाइनीज मांझा भारत में ही बनता है, सिर्फ इसका मुख्य कच्चा माल सिंथेटिक पॉलिप्रोपाइलीन या नायलॉन फिलामेंट ही चीन से आयात होकर आता है. चाइनीज मांझे में सिर्फ कांच का पाउडर नहीं बल्कि इसमें एल्यूमिनियम ऑक्साइड, टंगस्टन कार्बाइड, लेड और  स्टील डस्ट जैसे धातु के कण मिलाए जाते हैं. धातु पाउडर वाली कोटिंग की वजह से अगर यह हाई-टेंशन बिजली की तारों से टकराए तो करंट आने का खतरा बहुत बढ़ जाता है. चाइनीज मांझा इतना पतला और पारदर्शी होता है कि पक्षी इसे देख भी नहीं पाते हैं. 80-90% गंभीर पक्षी हादसे चाइनीज मांझे से ही होते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक दुकानदार इसे ‘नंबर 10’, ‘सुपर शार्प’, ‘फास्ट कट’, ‘इम्पोर्टेड’, ‘प्रोफेशनल’ जैसे कोड नेम से बेचते हैं ताकि पुलिस को शक ना हो.

लेकिन इस बार योगी आदित्यनाथ यूपी से चाइनीज मांझें को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अंग्रेज दार्शनिक थॉमस हॉब्स ने कहा है कि ‘कानून का पहला उद्देश्य जीवन की सुरक्षा है.’ यही कारण है चाइनीज मांझे से मौत को उन्होंने हत्या की श्रेणी कर दिया है.