
कट्टरपंथी सोच के बहुत सारे नुकसान हैं. कट्टरपंथियों को कानून के राज से डर होता है क्योंकि उन्हें पता है कि कानून सही ढंग से लागू होने पर उनका अतिवादी विचार लागू नहीं हो पाएगा. यही वजह है कि वो क़ानून से हमेशा दूर भागने की कोशिश करते हैं. ऐसे ही एक कट्टरपंथी मौलाना का बयान आजकल वायरल हो रहा है. अपने बयान में वो मुसलमानों को बरगलाने की कोशिश कर रहा है. अपने राज्य उत्तर प्रदेश के सिस्टम पर सवाल उठा रहा है. यूपी को बदनाम करने वाली बातें कह रहा है. कह रहा है कि यूपी में अब उसका मन नहीं लगता. मूल रूप से यूपी के इटावा के रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी के मुताबिक यूपी में मुसलमानों को धार्मिक आजादी नहीं है. वो इसका समाधान भी बता रहा है.
पहली बड़ी बात ये है कि मौलाना को अब यूपी में रहने का दिल नहीं करता. दूसरी बड़ी बात ये है कि यूपी में अब बिना इजाजत के मजहबी कार्यक्रम नहीं कर सकते. रात में लाउडस्पीकर नहीं बजा सकते. अवैध मदरसों पर बुलडोजर चलना और अन्य कारण मौलाना ने गिनाए.
चौथी बड़ी बात ये है कि यूपी की जगह अब बंगाल चले जाना चाहिए. करीब 9 साल पहले यूपी की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में कानून का राज स्थापित करने और तुष्टीकरण को दूर करने की कोशिश की है.
इस मिशन को पूरा करने के लिए योगी फोर्स ने माफियाओं पर कार्रवाई की है. अपराधियों को सबक सिखाने के लिए जितने एनकाउंटर यूपी में हुए हैं, उतने किसी दूसरे राज्य में नहीं हुए. अवैध निर्माण के खिलाफ यूपी के बुलडोज़र मॉडल को देश के कई राज्यों ने अपनाया. कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवाए गए. मदरसों की विदेशी फंडिंग की जांच करवाई गई. अवैध धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाया गया. गो तस्करों पर सख्त कार्रवाई की गई. अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ऑपरेशन टॉर्च चलाया गया.
लेकिन सरकार के इन्हीं कदमों से मौलाना जर्जिस अंसारी को डर लगता है. और अब वो यूपी को बदनाम करने की बातें कह रहा है. कह रहे हैं कि बिना इजाज़त के कार्यक्रम नहीं कर सकते. रात के वक़्त लाउडस्पीकर नहीं बजा सकते. लेकिन सवाल ये है कि क़ानून के दायरे में अगर कार्रवाई होती है तो मौलाना को आपत्ति क्यों होनी चाहिए? अगर मौलाना को लगता है कि कोई कार्रवाई संविधान के तहत नहीं है तो वो कोर्ट का रुख़ कर सकता है. बहुत से लोगों ने किया भी है. लेकिन मौलाना का मक़सद तो भ्रम फैलाना है, यूपी को बदनाम करना है, इसलिए वो ऐसा बयान दे रहा है.
हमने यूपी में रहने वाले आम मुसलमानों से भी बात की. उनसे मौलाना जर्जिस के बयान के बारे में पूछा. उनसे मौलाना की पलायन की अपील के बारे में पूछा तो लगभग सभी ने यही कहा कि एक आम मुसलमान को यूपी में कोई परेशानी नहीं है. वो यूपी छोड़कर बंगाल नहीं जाना चाहता. परेशानी सिर्फ उन्हे है जो मजहब के नाम पर जहर फैलाना चाहते हैं, नफरत फैलाने की छूट चाहते हैं, कट्टरता फैलाने की छूट चाहते हैं, गो तस्करी की छूट चाहते हैं, दंगा फैलाने की छूट चाहते हैं और सड़कों पर अराजकता फैलाने की छूट चाहते हैं. इन्हीं लोगों पर शिकंजा कसा है, जिसकी वजह से मौलाना को यूपी में परेशानी हो रही है. अब हम यूपी की जगह बंगाल से मौलाना के प्रेम का भी विश्लेषण करेंगे लेकिन उससे पहले आपको दोनों राज्यों में मुस्लिम आबादी के बारे में जानना चाहिए.
यूपी में मुस्लिम आबादी पूरे देश में सबसे ज्यादा है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यूपी में 3 करोड़ 85 लाख मुसलमान रहते हैं जबकि पश्चिम बंगाल में 2 करोड़ 47 लाख मुसलमान हैं. लेकिन जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में बंगाल में ज्यादा मुसलमान हैं. यूपी में जहां मुस्लिम आबादी 19 प्रतिशत है, वहीं बंगाल में 27 प्रतिशत.
2011 की जनगणना के मुताबिक यूपी में केवल एक ज़िले यानी रामपुर में मुस्लिम आबादी 50% से ज्यादा है. वहीं बंगाल में मुर्शिदाबाद और मालदा ये दो जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 50% से ज्यादा है. दोनों राज्यों में मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है. अब आपको दोनों राज्यों की आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानना चाहिए.
UP की अर्थव्यवस्था बंगाल की तुलना में लगभग 50% बड़ी है. UP भारत की GDP में 9% योगदान देता है जबकि बंगाल 6% के आसपास
यूपी की विकास दर जहां 10% से ज्यादा है वहीं बंगाल की विकास दर 7.5% के आसपास है. हालांकि प्रति व्यक्ति आय के मामले में पश्चिम बंगाल, यूपी की तुलना में बेहतर है
यानी अर्थव्यवस्था के ज्यादातर पैमानों पर पश्चिम बंगाल की तुलना में उत्तर प्रदेश बेहतर है. अच्छी अर्थव्यवस्था का मतलब अच्छा रहन-सहन और अच्छा जीवन होता है. जब यूपी की अर्थव्यवस्था पश्चिम बंगाल की तुलना में बेहतर है तो फिर मौलाना जर्जिस अंसारी यूपी के मुसलमानों को बंगाल जाने के लिए क्यों कह रहा है. DNA मित्रो, इसी जवाब में मौलाना जर्जिस अंसारी की अपील का मतलब छिपा हुआ है.
योगी आदित्यनाथ के 9 साल के शासन में जहां तुष्टीकरण को मिटाने का हरसंभव प्रयास किया गया है, वहीं ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के दौरान मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं. ममता बनर्जी सच्ची धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ऐसे फ़ैसले लेती रही हैं, जिसकी वजह से हिंदू उत्पीड़न और मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाते हैं.
यूपी में जहां घुसपैठियों के खिलाफ हर ज़िले में अभियान चलाया जाता है, वहीं बंगाल में घुसपैठियों को बसाने के आरोप लगाए जाते हैं. यूपी में जहां बाबरी मस्जिद बनाने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता, वहीं बंगाल में बाबरी मस्जिद ज़ोर-शोर से बनाई जा रही है. बंगाल में रामनवमी और दुर्गा पूजा पर क़ानूनी सख़्ती के आरोप लगते हैं, वहीं ईद और मुहर्रम पर उदारता बरतने का आरोप लगाया जाता है. चुनावी साल के बजट में भी ममता सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगे हैं. बीजेपी ने आंकड़ों के सहारे पश्चिम बंगाल के बजट में मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया है.
बीजेपी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के बजट में उद्योग-वाणिज्य के लिए 1,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. IT के लिए सिर्फ 217 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं विज्ञान और शोध के लिए मात्र 82 करोड़ रुपये रखे गए हैं. लेकिन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मदरसों के लिए 5,713 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.
शायद तुष्टीकरण का यही वो तथ्य है जो मौलाना जर्जिस अंसारी जैसे लोगों को यूपी की तुलना में बंगाल ज्यादा आकर्षक बनाता है. तुष्टीकरण पर योगी सरकार की सख़्ती के कारण ही मौलाना जर्जिस अंसारी का दिल उत्तर प्रदेश में नहीं लग रहा है. यूपी से पूरी तरह मोहभंग हो गया है.

