Chabahar port project: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आम बजट पेश किया. उन्होंने नौवीं बार लगातर बजट पेश करने के साथ अपने नाम रिकॉर्ड भी दर्ज कर लिया. वित्त मंत्री ने करीब एक घंटे 25 मिनट तक भाषण दिया. बजट में कई बड़े ऐलान किए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को सुधारों की यात्रा को मजबूत करने वाला करार दिया है. हालांकि, इस साल के बजट में भारत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई है. माना जा रहा है कि अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों की पृष्टभूमि में उठाया गया है.
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि भारत ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चल रही मेगा कनेक्टिविटी परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. चूंकि, इस बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है. पिछले साल सितंबर के महीने में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. हालांकि, चारबहार बंदरगाह परियोजना पर दंडात्मक उपायों से भारत को छह महीने की छूट दी थी.
अमेरिका के साथ भारत की बातचीत
इसी साल 26 अप्रैल को ये छूट समाप्त होने जा रही है. इसी साल जनवरी के महीने में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की ओर से कहा गया था कि नया भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना से संबंधित मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है. इस बीच ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि ट्रंप प्रशासन द्वारा तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बाद भारत इस परियोजना से संबंधित विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा था.
भारत और ईरान मिलकर कर रहे इस बंदरगाह का विकास
उल्लेखनीय है कि भारत और ईरान मिलकर चारबहार बंदरगाह का विकास कर हैं, जिससे समुद्री संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके. बताया जाता है कि ये दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं. चूंकि, INSTC एक 7,200 किलोमीटर लंबी एक बहु-मार्ग परिवहन परियोजना है. इसका मुख्य उद्देश्य भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई करना है.
क्यों चाबहार को माना जा रहा बेहद महत्वपूर्ण?
गौलतलब है कि चाबहार को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की पहुंच का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. इतना ही नहीं हाल के वर्षों में इसका उपयोग अनाज और चिकित्सा सामग्री सहित मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए किया गया है. अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से इसके जोड़ने की योजना के साथ, यह बंदरगाह क्षेत्रीय रसद में एक अहम भूमिका निभा सकता है. इसके बाद मध्य एशिया, रूस और उससे आगे के व्यापार के लिए रास्ते खुल जाएंगे. आपको जानना चाहिए कि रूस ने भी मध्य एशिया के रास्ते चाबहार बंदरगाह से भारत के साथ अपने कुछ व्यापार को जोड़ने की संभावना तलाशी है.
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