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छोटे से ताबूत को सफेद चादर से ढके तख्त पर रखा गया था. पुलिस के जवानों ने बंदूकें आसमान की तरफ की. एक आवाज पर सबने मिलकर सैल्यूट किया और धुन बजी. चारों तरफ लोगों की खचाखच भीड़ जमा थी. यह उस मासूम को अंतिम विदाई थी जिसने माता-पिता की सहमति पर अपने अंग दान कर दिए. वो बस 10 महीने की थी. कुछ घंटे पहले जब उसे राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी जा रही थी तो हर आंखें नम थीं. अब पूरा देश याद कर रहा है. 

अलीन शेरिन अब्राहम 5 फरवरी को एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थी. वह अपनी मां के साथ थी. डॉक्टरों ने लाख कोशिशें कीं लेकिन 12 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. इसके बाद उसके माता-पिता ने एक साहसिक फैसला लिया और अपने बेटे के अंगों को दान करने की परमिशन दे दी. उसके अंगों ने पांच लोगों को नई जिंदगी दी है. जी हां, बच्ची के लिवर, दो किडनियों, हर्ट वॉल्व और कॉर्निया डोनेट किए गए.

ब्रेन डेड का मतलब क्या होता है?

ब्रेन डेड यानी ब्रेन या मस्तिष्क का कार्यों का स्थायी और कभी न बदलने वाले रूप से बंद पड़ जाना. सरल भाषा में समझें तो ब्रेन डेड व्यक्ति के मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो जाती है. इस स्थिति में इंसान होश, सांस लेने की क्षमता और अपनी चेतना स्थायी रूप से खो चुका होता है. वेंटिलेटर दिल की धड़कन को तो कुछ समय के लिए बनाए रख सकती है लेकिन इंसान को फिर से ठीक नहीं किया जा सकता. अब वीडियो देखिए. 

ब्रेन डेड और मृत्यु में अंतर क्या है?

अब आपके मन में सवाल होगा कि ब्रेन डेड और सामान्य रूप से मौत में अंतर क्या होता है? वैसे तो दोनों ही स्थिति में कानूनी रूप से व्यक्ति की मृत्यु का बोध होता है लेकिन डॉक्टरी भाषा में दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं. जी हां, ब्रेन डेड व्यक्ति का मस्तिष्क स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है लेकिन वेंटिलेटर के सहारे दिल की धड़कन जारी रह सकती है. सामान्य मौत में दिल और सांस दोनों रुक जाते हैं.