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How is mineral water like water available from tap in Puri: भारत के ज़्यादातर हिस्सों में आजकल नल से आने वाले पानी को लोग पीने से बचते हैं. अगर कोई पीता भी है तो उसे उबालकर या फिल्टर करके पीने की सलाह दी जाती है. इसकी वजह गंदे पानी से बीमार पड़ने और मरने की आशंका होती है. हाल में मध्य प्रदेश के इंदौर जैसे देश के नंबर-1 स्वच्छ शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई. जिसके बाद यह समस्या देशभर में फिर से चर्चा में आ गई है. 

पुरी में घर-घर सप्लाई हो रहा ‘मिनरल’ वाटर

ऐसे माहौल में अगर आपको पता चले कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जहां लोगों नल से घर-घर ‘मिनरल’ वाटर सप्लाई किया जाता है तो आप निश्चित ही चौंक जाएंगे. लेकिन यह पूरी तरह सच है. इस शहर में लोग नल से सीधे पानी पीते हैं. वह भी बिना RO इस्तेमाल किए, बिना उबाले और बिना डर के. यह अद्भुत कारनामा करने वाला शहर है ओडिशा का पुरी.

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रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी भारत का ऐसा पहला शहर बन चुका है, जहां नल से आने वाला पानी भारतीय मानक ब्यूरो और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर खरा उतरता है. यह कारनामा किया है ओडिशा सरकार की ‘सुजल’ यानी ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप (DFT)’ योजना ने. इस योजना के तहत पूरे शहर में ऐसा जल नेटवर्क बनाया गया है, जिससे हर घर को 24 घंटे पीने योग्य शुद्ध पानी मिलता है. फिलहाल करीब 25 हजार से ज्यादा घरों में इसी नेटवर्क के जरिए मिनरल-क्वालिटी वाला पानी सप्लाई किया जा रहा है. 

शहर में लगाई जल शुद्धिकरण प्रणाली

एक्सपर्ट बताते हैं कि पुरी में लोगों को साफ पानी सप्लाई करने के लिए अत्याधुनिक जल शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित की गई है. इसके लिए शहर के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में कच्चे पानी को कई चरणों से गुजारा जाता है. सबसे पहले उसकी गाद निकाली जाती है. इसके बाद फिल्ट्रेशन किया जाता है. फिर डिसइन्फेक्शन का दौर चला है. फिर उस पाानी का अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन, क्लोरीनीकरण और ओजोनीकरण किया जाता है. इन सब राउंड को करने के बाद पानी में छिपे बैक्टीरिया, वायरस और भारी धातुएं पूरी तरह हट जाती हैं. उस पानी में नियंत्रित मात्रा में क्लोरीन मिलाया जाता है. जिससे पानी सुरक्षित भी रहे और उसका स्वाद भी खराब न हो.

इस पूरी प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए पुरानी जंग लगी पाइपलाइनों को बदलकर  फूड-ग्रेड हाई-प्रेशर पाइप बिछाए गए हैं. लगातार दबाव बनाए रखने से बाहर की गंदगी उन पाइपों में अंदर नहीं घुस पाती. जगह-जगह लगे सेंसर पानी की गुणवत्ता को रियल-टाइम मॉनिटर करते हैं. अगर कहीं गड़बड़ी होती है तो तुरंत सप्लाई रोक दी जाती है. इसके अलावा लैब में रोजाना पानी के रैंडम सैंपल जांचे जाते हैं.

अब दूसरे शहर भी अपना रहे ये मॉडल

इन सारे प्रयासों का नतीजा ये निकला है कि अब पुरी के पानी में E. coli जैसे हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पाए जाते. वहां के पानी में pH और TDS भी संतुलित रहता है. जिसकी वजह से लोगों में पानी से होने वाली बीमारियां भी बहुत घट गई हैं. साथ ही शहर के लोगों की बोतलबंद पानी और RO पर निर्भरता तेजी से घट गई है. यही नहीं, शहर में RO से निकलने वाले पानी की बर्बादी भी काफी कम हो गई है. 

पुरी की सफलता के बाद अब भुवनेश्वर और कटक जैसे शहरों में भी यह मॉडल अपनाया जा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति, निवेश और पारदर्शी प्रशासन हो, तो पूरे भारत में नल से सीधे पीने योग्य पानी एक हकीकत बन सकता है. पुरी ने दिखा दिया है कि साफ पानी कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि संभव बुनियादी अधिकार है.