Bharat Mata Ki Jai Owaisi: असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर ऐसा कुछ बोला है कि जो चर्चा में है. तेलंगाना के सदासिवपेट में हुई जनसभा में उन्होंने ऐसा बयान दिया कि पूरे देश में चर्चा छिड़ गई है. ओवैसी ने साफ कहा- देश ‘भारत माता की जय’ बोलने से नहीं चलेगा, बल्कि संविधान से चलेगा. इसके लिए उन्होंने संविधान का तर्क दिया और कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत ‘We the People’ यानी ‘हम लोग’ से होती है, ‘Bharat Mata’ के नाम से नहीं.
#WATCH | Sadasivpet, Telangana: AIMIM Chief Asaduddin Owaisi says, “When the debate was going on, on the 150th anniversary of Vande Mataram, I stood up and told the entire Parliament that on January 24, 1950, we gave ourselves a constitution, and that constitution begins with the… pic.twitter.com/hOpW50yMtC
— ANI (@ANI) February 8, 2026
Add Zee News as a Preferred Source![]()
‘भारत माता’ के नाम से नहीं चलेगा देश
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में हुई बहस का जिक्र करते हुए ओवैसी ने भारतीय संविधान, देशभक्ति और धर्म को लेकर अपनी बात करते हुए कहा कि 24 जनवरी 1950 को भारत ने खुद को जो संविधान दिया, उसकी शुरुआत ‘We the People’ यानी ‘हम भारत के लोग’ से होती है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संविधान की शुरुआत ‘भारत माता’ के नाम से नहीं होती, बल्कि यह सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की भावना से शुरू होता है.
अनुच्छेद 25 और धार्मिक स्वतंत्रता
AIMIM प्रमुख ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है. यानी हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, न मानने और अपने तरीके से मानने का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और भाईचारे जैसे मूल्यों की बात की गई है, जो भारत की असली पहचान हैं.
देशभक्ति को धर्म से जोड़ने पर सवाल
ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर देश से प्रेम को किसी एक धार्मिक प्रतीक या पूजा-पद्धति से जोड़ दिया जाए, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उन लोगों की कुर्बानियों को कैसे समझाया जाएगा, जिन्होंने बिना किसी धार्मिक पहचान के देश के लिए अपनी जान दी.
बहादुर शाह ज़फर का उदाहरण
ओवैसी ने 1857 की आज़ादी की पहली लड़ाई के नायक बहादुर शाह ज़फर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और अंत में उनकी मौत रंगून (अब यांगून) में हुई.
ओवैसी ने सवाल किया, “अगर आप कहें कि देश से मोहब्बत किसी एक धर्म से जुड़ी है, तो फिर बहादुर शाह ज़फर को क्या जवाब दोगे?”
यूसुफ मेहरअली का भी जिक्र
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी यूसुफ मेहरअली का नाम भी लिया, जिन्होंने महात्मा गांधी को ‘Quit India’ आंदोलन का नारा सुझाया था और ‘Go Back Simon’ का नारा दिया था. ओवैसी ने कहा कि इन लोगों की देशभक्ति पर कभी सवाल नहीं उठे, फिर आज देशभक्ति को एक ही सोच में क्यों बांधा जा रहा है?
सियासी हलकों में हलचल
ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. समर्थक इसे संविधान की सच्ची व्याख्या बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे विवादास्पद बयान करार दे सकते हैं.
