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भारत में घरेलू स्तर पर होने वाला दान हर साल लगभग 54 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा धार्मिक संस्थाओं को जाता है. ‘How India Gives 2025-26’ रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को मिलता है, जबकि 41.8% दान सीधे गरीबों, जरूरतमंदों और भीख मांगने वालों तक पहुंचता है. गैर-धार्मिक संस्थाओं को कुल दान का केवल 14.9% हिस्सा मिलता है.

जानकारी के अनुसार, ये अध्ययन 20 राज्यों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है. इस रिपोर्ट का उद्देश्य ये समझना था कि आम भारतीय नकद, वस्तुओं या सेवा के रूप में किस तरह योगदान करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में दान देने की बात स्वीकार की.

हर आय वर्ग के लोग भारत में कर रहे दान

‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ रिपोर्ट बताती है कि भारत में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं. रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में देखा गया. जिन परिवारों की मासिक आय 4000 से 5000 रुपये है, उनमें भी करीब आधे घर दान करते हैं. जैसे-जैसे आय बढ़ती है, दान में भागीदारी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. दान का बड़ा हिस्सा भोजन के रूप में मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक पहुंचता है. धार्मिक संस्थानों में सेवा देना सबसे आम सामाजिक योगदान है.

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दार के कई फार्मेट में लोग कर रहे सेवा

रिपोर्ट में दान के तरीकों का भी विश्लेषण किया गया है. सामान या वस्तुओं के रूप में मदद का हिस्सा सबसे अधिक, लगभग 46-48% है. नकद दान 44% है, जबकि करीब 30% लोगों ने समय देकर सेवा (वॉलंटियरिंग) करने की बात कही. रिपोर्ट ये भी दर्शाती है कि भारत में दान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि  सामुदायिक और संबंधों पर आधारित भी है.

भारत में धार्मिक और नैतिक प्रेरणा बन रही दान की मुख्य वजह

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 90% से अधिक लोग दान को धार्मिक कर्तव्य या नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं. यही कारण है कि धार्मिक संस्थाओं को सबसे अधिक दान मिलता है. रिपोर्ट लॉन्च के दौरान सेंटर फॉर सोशल इम्पैक्ट एंड फिलैंथ्रॉपी (CSIP) की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ये अध्ययन भारत की उस उदारता को सामने लाता है, जिसे अक्सर कम आंका गया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर किए गए विश्लेषण से यह समझने में मदद मिलती है कि भारत में दान का स्वरूप क्या है और आर्थिक विकास के साथ इसमें कैसे बदलाव आता है.

रिपोर्ट में दानदाताओं को 4 वर्गों में बांटा गया है. 

1. ग्रासरूट गिवर्स, 

2. एस्पिरेशनल गिवर्स, 

3. प्रैक्टिकल गिवर्स 

4. वेल-ऑफ गिवर्स 

इनकी प्रेरणाएं, जागरूकता का स्तर और योगदान के तरीके अलग-अलग पाए गए. रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत में दान की परंपरा गहरी और व्यापक है, जो आय, क्षेत्र और सामाजिक स्थिति से परे जाकर समाज के हर वर्ग में मौजूद है.