
MNREG Act 2005 Vs VB-G RAM G: हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कैबिनेट सहयोगियों और पार्टी नेताओं के साथ राज्य की राजधानी के ऐतिहासिक रिज ग्राउंड में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद, कांग्रेस नेताओं ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने और उसमें बदलाव किए जाने के विरोध में सुबह 11 बजे से दो घंटे का उपवास रखा. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने न केवल मनरेगा का नाम बदला है, बल्कि इस योजना की मूल भावना को भी कमजोर किया है.
कारगर रही योजना: CM
उन्होंने पहले कहा था कि इस योजना ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को रोजगार के मौके किए थे, लेकिन अब रोजगार के अवसर कम किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ग्राम प्रधानों को मनरेगा के तहत सड़क निर्माण जैसे कार्यों को करने का अधिकार प्राप्त था, जिससे लोगों के घरों के पास रोजगार सुनिश्चित होता था और कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने लोगों को अधिकतम रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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राज्यों को दिक्कत क्या है?
हालांकि, अब पंचायत प्रधानों के अधिकार छीन लिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने आगे ये भी कहा है कि पिछले 20 वर्षों से मनरेगा रोजगार की गारंटी देता रहा है और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी प्रदान करता रहा है. आज का दो घंटे का उपवास योजना को व्यवस्थित रूप से समाप्त किए जाने के विरोध में था. उन्होंने बताया कि पहले केंद्र सरकार मनरेगा के तहत 100 प्रतिशत खर्च वहन करती थी, लेकिन अब इसे 90:10 के अनुपात में वित्त पोषण में बदल दिया गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
सरकार का कहना है कि अब काम के दिनों में बढ़ोतरी करके नया विजन पेश किया गया है. पुराने मनरेगा कानून में ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल काम की गारंटी दी जाती थी. नए VB-GRAM G बिल में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया.
कांग्रेस कर ही आंदोलन
मनरेगा पर कांग्रेस देश भर में आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, खरगे समेत कांग्रेस के तमाम नेता इसका विरोध कर रहे हैं. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को राम के नाम से दिक्कत है, इसलिए वो विरोध में हैं. (IANS)
