
मुंबई बीएमसी में तो ठाकरे ब्रदर्स एक हुए थे लेकिन थोड़ी दूर जाते ही खेला हो गया. राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया. हां, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में सत्ता समीकरण बदल गए हैं. यह गठबंधन अप्रत्याशित है. यह फैसला लिया मनसे के पूर्व विधायक प्रमोद रतन पाटिल ने. खलबली मची तो पार्टी ने दावा किया कि राज्य की लीडरशिप ने अपनी स्थानीय यूनिटों को जमीनी सच्चाई के आधार पर काम करने और फैसले लेने की आजादी दे रखी है.
ठाणे की इस महानगरपालिका में यह घटनाक्रम इसलिए भी चौंका रहा है क्योंकि शिंदे सेना ने स्थानीय चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था. शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने यह दावा कर खलबली मचा दी कि मनसे ने उनकी पार्टी को सपोर्ट दे दिया है. उधर, मनसे का फैसला चचेरे भाई उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लिए बड़ा झटका है क्योंकि दोनों पार्टियों ने 15 जनवरी को बीएमसी का चुनाव एकसाथ लड़ा था.
122 सदस्यों वाले कल्याणी डोंबिवली महानगरपालिका में शिवसेना को सबसे ज्यादा 53 सीटें मिली थी जबकि सहयोगी भाजपा को 50 सीटें मिली थी. मनसे के पास 5 सीटें हैं. अब यह गठबंधन 108 तक पहुंच जाता है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 11, कांग्रेस को 2 और शरद पवार की एनसीपी ने एक सीट जीती है.
शिंदे सेना के कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह गठबंधन मनसे और शिवसेना के बीच हुआ है किसी दूसरी पार्टी के साथ नहीं. उन्होंने सीधे तौर पर तो नहीं कहा लेकिन साफ है कि मनसे अगर शिंदे सेना को सपोर्ट कर रही है तो शिंदे खुद को नंबर एक मानते हुए अपना ही मेयर चाहेंगे. हालांकि श्रीकांत ने कहा है कि मेयर महायुति से होगा.
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