
Telangana Naxalite Barsa Deva alias Sukka Surrender News: मोदी सरकार की ओर से देश में नक्सलवाद की समस्या खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय किए जाने के बाद से उनके खिलाफ सुरक्षाबलों का ऑपरेशन लगातार जारी है. इसका असर नक्सलियों पर भी साफ दिख रहा है. मारे जाने के डर से नक्सलवादी लगातार सुरक्षाबलों के आगे सरेंडर कर रहे हैं. गुरुवार को भी माओवादी पार्टी के शीर्ष नेता बर्सा देवा उर्फ सुक्का ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.
सरेंडर के लिए 4 राज्यों से संपर्क
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बर्सा देवा उर्फ सुक्का ने सरेंडर के लिए अपने मध्यस्थों के जरिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना पुलिस से संपर्क किया था. फिर लंबे विचार-विमर्श के बाद उसने तेलंगाना में समर्पण का फैसला किया. तेलंगाना की कोठागुडेम जिला पुलिस उसे जंगल से एस्कॉर्ट करके लाई, जिसके बाद उसने हथियार डाल दिए. उस पर 50 लाख रुपये का इनाम था. पुलिस की ओर से उसके सरेंडर की आधिकारिक सूचना एक दो दिनों जारी होने की उम्मीद है.
छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों ने खुलासा किया कि हिडमा के एनकाउंटर से पहले ही उसने न्होंने सरेंडर करने का फैसला कर लिया था. जब सुरक्षाबलों के हाथों हिडमा मारा गया तो यह प्रक्रिया और तेज हो गई.उनके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम था.
सुकमा जिले का रहने वाला है बर्सा देवा
सूत्रों के मुताबिक, बर्सा देवा सुकमा जिले के पुवर्थी गांव का रहने वाला है. उसने लगभग डेढ़ दशक तक एनकाउंटर में मारे गए हिडमा के साथ काम किया था.जब पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी के 1 नंबर बटालियन के कमांडर हिडमा को सेंट्रल कमिटी में पदोन्नत किया गया तो इस पद के लिए जिम्मेदारियां बर्सा देवा को सौंपीं गईं.बाद में उसने नक्सलवाद के राज्य सैन्य आयोग की जिम्मेदारियां भी संभालीं.
बर्सा देवा ने नक्सलवाद की शुरुआत दरभा डिविजनल कमिटी में सचिव स्तर से शुरू की थी. इसके बाद वह पीएलजीए की 1st बटालियन कमांडर तक पहुंचा. उसने सुरक्षाबलों के खिलाफ कई खूनी ऑपरेशनों में भाग लिया. छत्तीसगढ़ पुलिस के मुताबिक, बर्सा ने घात लगाकर कई ऐसे हमले किए, जिनमें सीआरपीएफ के जवान मारे गए थे.
मोदी सरकार के सख्त रुख से दहशत
सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन मोदी सरकार की ओर से नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए जाने के बाद स्थितियां बदलती चली गईं. सुरक्षाबलों की ओर से लगातार कारगर एनकाउंटर, शीर्ष माओवादियों के मुठभेड़ में मारे जाने या सरेंडर करने से नक्सलियों में नेतृत्व की कमी होती चली गई.
बासवराजू और हिडमा के एनकाउंटर के बाद निचले स्तर के माओवादियो में भ्रम पूरी तरह तेज हो गया. अपनी जान बचाने के लिए उन्हें अब सरेंडर ही सबसे सही विकल्प नजर आ रहा है. बर्सा देवा ने भी मौका देखा और सरेंडर का दांव चल दिया.
अपने एनकाउंटर का सताया था डर
बर्सा की इस गिरफ्तारी के साथ ही उनके हिमायतियों को उसके एनकाउंटर का डर भी सताने लगा है. सिविल लिबर्टीज कमिटी के तेलंगाना अध्यक्ष और महासचिव ने एक प्रेस रिलीज जारी कर सरकार से मांग की है कि तेलंगाना पुलिस बर्सा देवा को अदालत के सामने पेश करे.उन्होंने कहा कि बर्सा के साथ 15 अन्य लोग भी हैं. बयान में कमेटी ने याद दिलाया कि दो दिन पहले पुलिस ने उन्हें तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा के पास पकड़ा था.
