Myanmar earthquake: देश के पूर्वी हिस्से में मंगलवार रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप मापने वाली एजेंसी ने इसका केंद्र म्यांमार बताया है. जहां रात 9.40 मिनट पर एक शक्तिशाली भूकंप आया. पहले इस भूकंप की तीव्रता 5.9 बताई गई लेकिन बात में इस भूकंप की तीव्रता 6.0 मैग्नीट्यूड बताई गई. इस भूकंप का केंद्र अक्षांश 20.42 उत्तर और देशांतर 93.88 पूर्व पर स्थित था, जिसकी गहराई मुख्य रूप से 27 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि कुछ जगहों पर 10 किलोमीटर से 63 किलोमीटर तक रिपोर्ट की गई है.
दूर-दूर तक महसूस हुए झटके
म्यांमार में धरती इस कदर डोली की उसका असर कोलकाता से लेकर ढाका तक महसूस किया गया. भूकंप मापने वाली एजेंसी के मुताबिक, बीते तीन दिनों में म्यांमार में आया ये तीसरा भूकंप है. जिसमें अभी तक किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं बांग्लादेश में 24 घंटे से भी कम समय में दूसरी बार झटके महसूस किए गए. इससे पहले मंगलवार को नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने अपने एक बयान में कहा कि देश में 4.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था.
जान-माल के नुकसान की खबर नहीं सर्वे जारी
भूकंप का मुख्य क्षेत्र म्यांमार (बर्मा) में है, विशेष रूप से राखाइन राज्य के निकट, जहां सित्तवे (एक्याब) से लगभग 70-100 किलोमीटर पूर्व या उत्तर दिशा में, एन टाउन के आसपास का इलाका प्रभावित रहा. यह भूकंप उथली गहराई पर होने के कारण काफी तेज महसूस हुआ. म्यांमार के कई इलाकों में भारी कंपन हुआ, लेकिन तत्काल कोई बड़े नुकसान या हताहत की रिपोर्ट नहीं आई है. प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर रहा है.
सड़कों पर अफरातफरी खाली मैदानों की ओर भागे लोग
भारत के पूर्वी हिस्सों में, खासकर कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मजबूत झटके महसूस किए गए. लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए, इमारतें हिलीं और वस्तुएं गिरने लगीं. कोलकाता में कुछ मिनटों के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन कोई बड़ा नुकसान या हताहत नहीं हुआ. बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी झटके महसूस हुए, जहां लोग सड़कों पर उतर आए.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) और अन्य एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र इंडियन प्लेट और बर्मा प्लेट के टकराव वाला सक्रिय सीस्मिक जोन है, जहां ऐसे भूकंप आम हैं. उथली गहराई (10-60 किमी) के कारण कंपन दूर तक फैला.
हर 30 सेकेंड में डोलती है धरती
एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती पर हर 30 सेकंड यानी एक मिनट में दो बार कहीं न कहीं एक भूकंप आता है. हालांकि उनमें से ज्यादातर इतने कमजोर होते हैं कि धरती के नीचे हुई हलचल यानी टेक्टॉनिक प्लेट्स के टकराने से पैदा हुई ऊर्जा और हलचल का पता तक नहीं चलता. (IANS)
